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गन्ने के साथ दलहनी फसलों की सह-फसली खेती से बढ़ेगा मुनाफा, मिट्टी भी रहेगी स्वस्थ

 ब्यूरो रिपोर्ट: सुधीर सिंह कुम्भाणी

सीतापुर | सांडा

सेकसरिया चीनी मिल बिसवां के सांडा जोन अंतर्गत बेल्हौरा गांव में गन्ना किसान राजेंद्र वर्मा के खेत पर गन्ने के साथ मटर, चना, लहसुन और धनिया की सह-फसली खेती का सफल प्रयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में खेत पर आयोजित किसान गोष्ठी में किसानों को सह-फसली खेती के लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई।

चीनी मिल के प्रमुख सलाहकार वैज्ञानिक डॉ. रामकुशल सिंह ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि रासायनिक खादों का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी की सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इसके स्थान पर गौ आधारित जैविक खेती अपनाकर गोबर और गोमूत्र से बनी खाद का उपयोग करें, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और उपज भी बेहतर होगी।

उन्होंने बताया कि गन्ने के साथ दलहनी फसलें जैसे मटर, मसूर, उड़द, मूंग और चना लगाने से खेत में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनी रहती है और किसानों को अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त होती है।
डॉ. सिंह ने सिंचित क्षेत्रों में सीओ-15023 तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में सीओएस-13231 प्रजाति के गन्ने की बुवाई 4 फीट की दूरी पर एकल पंक्ति विधि से करने की सलाह दी।

इस अवसर पर जीवामृत बनाने की विधि भी किसानों को बताई गई।
चीनी मिल के उप प्रबंधक विमल मिश्रा ने कहा कि सह-फसली खेती अपनाकर किसान भाई अपनी आय बढ़ा सकते हैं और चीनी मिल को स्वच्छ व ताजे गन्ने की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं।

गोष्ठी में सांडा जोन प्रभारी ऋषिकांत मिश्रा, पर्यवेक्षक श्याम सुंदर, गन्ना किसान डॉ. रामदेव वर्मा, कृपा शंकर वर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।


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