संवाददाता: उन्नाव
जनपद – उन्नाव | विकास खंड – गंजमुरादाबाद
उन्नाव जनपद के विकास खंड गंजमुरादाबाद अंतर्गत ग्राम पंचायत महोलिया में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की कथित मिलीभगत से शासन की मंशा और तय नियमों को दरकिनार कर अपात्र व्यक्तियों को आवास का लाभ दे दिया गया, जबकि वास्तविक पात्र आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
पात्रों की अनदेखी, प्रभावशाली बने लाभार्थी
शिकायतकर्ता रामवीर पुत्र सिपाही लाल और मान सिंह पुत्र छन्गा लाल ने आरोप लगाया है कि ग्राम सभा में कई ऐसे गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद परिवार मौजूद हैं, जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान तक नहीं है। इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया गया। वहीं दूसरी ओर, ऐसे लोगों को आवास स्वीकृत कर दिए गए जो पहले से पक्के मकान के मालिक हैं या आर्थिक रूप से सक्षम माने जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों की खुली अवहेलना करते हुए की गई, जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर बार-बार संबंधित अधिकारियों और प्रशासन से शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह आशंका और गहरी होती जा रही है कि ग्राम पंचायत स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो कई वास्तविक पात्रों को आज तक आवास मिल चुका होता। कार्रवाई न होने से शासन की “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” नीति पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने पर ग्राम प्रधान, पंचायत अधिकारी सहित सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके और वास्तविक पात्रों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
अब बड़ा सवाल यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का दावा करने वाला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक मौन साधे रहेगा?
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह कागजी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल ग्राम पंचायत महोलिया में इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीण एकजुट होकर निष्पक्ष जांच और पात्र लाभार्थियों को उनका हक दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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