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ट्रांसफार्मर हादसे के बाद संवेदनशील नेतृत्व की पहल, पीड़ित बच्चे के उपचार से लेकर जवाबदेही तक कार्रवाई

 

ब्यूरो रिपोर्ट: सोम दत्त ✍️

लखनऊ। सार्वजनिक जीवन में नेतृत्व की वास्तविक कसौटी संकट की घड़ी में त्वरित निर्णय, मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक समन्वय से तय होती है। सरोजनीनगर क्षेत्र में हाल ही में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद ऐसा ही उत्तरदायी नेतृत्व देखने को मिला, जब सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने पीड़ित बच्चे के उपचार, परिवार को सहायता और दोषियों पर कार्रवाई के लिए ठोस पहल की।

दिनांक 11 जनवरी 2026 को सैनिक विहार कॉलोनी, बिजनौर में खुले और असुरक्षित विद्युत ट्रांसफार्मर के संपर्क में आने से आठ वर्षीय अर्पित गुप्ता, पुत्र श्री राकेश पाल, गंभीर रूप से झुलस गया। घटना की सूचना मिलते ही बच्चे के इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए के.जी.एम.यू., लखनऊ में उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई। अब तक लगभग 75 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता डॉ. राजेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके साथ ही उनकी टीम के सदस्यों द्वारा रक्तदान कर पीड़ित परिवार को चिकित्सकीय और नैतिक सहयोग भी प्रदान किया गया।

चूंकि पीड़ित परिवार मूल रूप से मोहनलालगंज विधानसभा क्षेत्र का निवासी है, इसलिए संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने मोहनलालगंज के विधायक से विधायक निधि के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का औपचारिक अनुरोध किया, ताकि बच्चे का इलाज निर्बाध रूप से जारी रह सके।

घटना को केवल दुर्घटना मानकर सीमित न रखते हुए, इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार को शासन स्तर से समुचित सहायता और मुआवजा दिए जाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त ऊर्जा मंत्री को भेजे गए पत्र में एफआईआर दर्ज कराने, निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई, तत्काल मुआवजा देने तथा क्षेत्र में अन्य असुरक्षित ट्रांसफार्मरों की पहचान कर फेंसिंग और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस संबंध में डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए सख्त मानकों का पालन तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि संवेदनशीलता, संवैधानिक दायित्व और प्रशासनिक दृढ़ता के समन्वय से ही पीड़ितों को न्याय, राहत और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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