ब्यूरो रिपोर्ट सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️
सीतापुर के सकरन क्षेत्र में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अधिकांश ग्राम पंचायतों में नल तो लगाए गए, लेकिन जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। कई स्थानों पर मार्ग खुदे पड़े हैं, आरसीसी और इंटरलॉकिंग उखड़ी हुई है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और हादसों का खतरा बना हुआ है।
क्षेत्र की रसूलपुर, कोंसर, सेमराखुर्द, रउवापुर नेवादा, कम्हरिया खुन-खुन और कौवा खेड़ा सहित कुछ ही ग्राम पंचायतों में आंशिक जलापूर्ति हो रही है, जबकि नसीरपुर, सांडा, मजलिसपुर, रत्नापुर, किरतापुर, उल्लहा, जालिमपुर, सैदापुर, सकरन, सकरन खुर्द, शाहपुर, देवरिया, झउवा खुर्द, झउवा कला, पटना, अरुआ, महराजनगर, बेलवा, बेलवा बसहिया, ताजपुर सलौली, इस्माइलपुर, कुण्डी, अमिरती, अदवारी, गठिया कला, बरछता, कम्हरिया महरिया, चिल्हिया, लखनियापुर, पखनियापुर, दुगाना, काजीपुर, रेवान, देवतापुर, कंकरकुई, बगहाढाख समेत कई ग्राम पंचायतों में सड़कें खुदी मिलीं, लेकिन पानी की आपूर्ति की व्यवस्था नहीं दिखी।
ग्रामीणों का कहना है कि मिशन के नाम पर रास्ते खोद दिए गए, लेकिन टोंटी तक पानी नहीं पहुंचा। कई जगह अधूरी पानी की टंकियां खड़ी हैं। हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोरिंग कागजों पर दिखाए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जो हैंडपंप पहले पानी दे रहे थे, वे भी अब खराब पड़े हैं।
मिशन के तहत युवाओं को प्रशिक्षण और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ‘जल सखी’ बनाकर रोजगार देने के दावे भी अधूरे बताए जा रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि प्रशिक्षण तो दिया गया, लेकिन न रोजगार मिला और न ही मानदेय। इससे युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई और जल्द जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
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