शाहजहाँपुर, 06 फरवरी 2026। वरुण अर्जुन मेडिकल कॉलेज एवं रोहिलखंड हॉस्पिटल में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष जन-जागरूकता एवं शैक्षणिक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गुप्ता ने की, जबकि डीन एवं प्राचार्य डॉ. रविन्द्र नाथ शुक्ला (कर्नल) मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक, पीजी, ट्यूटर, पैरामेडिकल एवं फार्मा फैकल्टी, फॉरेंसिक साइंसेज़ विभाग, एमबीबीएस छात्र तथा इंटर्न्स ने सक्रिय सहभागिता की। बाहरी अतिथियों में जिला मलेरिया अधिकारी राजीव मौर्य, WHO के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. राहुल, PCI इंडिया–NTD की डिविजनल ऑफिसर अनीता सिंह तथा यूनिसेफ के डिस्ट्रिक्ट मोबिलाइजेशन कोऑर्डिनेटर योगेश शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
डीन डॉ. शुक्ला ने फाइलेरिया के प्रति व्यापक जन-जागरूकता और सामूहिक औषधि सेवन कार्यक्रम (MDA) में सहभागिता को आवश्यक बताया। विभागाध्यक्ष डॉ. गुप्ता ने बताया कि यह रोग संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है, इसलिए मच्छर नियंत्रण और समय पर दवा सेवन बेहद महत्वपूर्ण है। WHO प्रतिनिधि डॉ. राहुल ने रोग की पहचान, उपचार, रोकथाम और राष्ट्रीय रणनीतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं अनीता सिंह ने बताया कि फाइलेरिया हाइड्रोसील जैसी दीर्घकालिक विकलांगता का कारण बन सकता है, जिसे समय पर जांच, जागरूकता और एमडीए अभियान के दौरान दवा सेवन से रोका जा सकता है।
कार्यक्रम में फार्मेसी एवं पैरामेडिकल छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से फाइलेरिया के लक्षण, बचाव और सामूहिक दवा सेवन के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग है, जो हाथ-पैरों में सूजन, हाथीपांव और हाइड्रोसील जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। समय पर जांच, मच्छर नियंत्रण, जन-जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से फाइलेरिया मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
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