विशेष संवाददाता, लखनऊ
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्ट्रे डॉग रिमूवल से जुड़े फैसले के विरोध में राजधानी लखनऊ में पशु अधिकारों को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है। आंदोलन की शुरुआत लोहिया पार्क से हुई, जिसके बाद हज़रतगंज, आशियाना चौराहा, वायरलेस चौराहा और महानगर सहित शहर के कई प्रमुख स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से “No Pound, No Shelter” के नारे लगाते हुए प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया।
विरोध प्रदर्शन में पशु क्रूरता के क्षेत्र में कार्यरत संस्था आसरा द हेल्पिंग हैंड्स के साथ पशु अधिकार कार्यकर्ता अनु बोस, सोमिल श्रीवास्तव, पूर्णा खरे, राहुल वर्मा, अलवीना खान, जुनैद खान सहित बड़ी संख्या में पशु प्रेमी शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान संस्था आसरा द हेल्पिंग हैंड्स तथा पशु अधिकार कार्यकर्ता अनु बोस और चारु खरे के नेतृत्व में नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाउंड और शेल्टर के नाम पर स्ट्रे जानवरों को कैद करना समाधान नहीं, बल्कि एक प्रकार की क्रूरता है।
पशु अधिकार कार्यकर्ता अनु बोस ने कहा कि स्ट्रे डॉग्स को हटाने या पाउंड में रखने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उनके अनुसार, इस विषय में मानवीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
संस्था की संस्थापक चारु खरे ने कहा कि स्ट्रे डॉग्स समाज का हिस्सा हैं और उन्हें बंद करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन को व्यापक जनसरोकारों से जोड़ने के उद्देश्य से कार्यकर्ताओं ने जल्द ही नुक्कड़ नाटक आयोजित करने की घोषणा की है, ताकि आम जनता को पशु अधिकारों और संबंधित मुद्दों की जानकारी दी जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) जैसे स्थायी उपायों को प्राथमिकता दी जाए।
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