शाहजहाँपुर, 17 मार्च 2026।
उत्तर प्रदेश आज जैव विविधता के साथ-साथ पशुधन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण और पशुपालकों के हित में चलाई जा रही योजनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश 388.15 लाख मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन के साथ देश में प्रथम स्थान पर है। वहीं प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता लगभग 450 ग्राम प्रतिदिन तक पहुँच चुकी है। पशुपालन विभाग द्वारा पशुधन के विकास के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं।
प्रदेश में पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए विकासखंड से लेकर तहसील स्तर तक 2202 पशु चिकित्सालय संचालित हैं। इसके अलावा मोबाइल वेटनरी यूनिट की सुविधा भी शुरू की गई है, जिसके तहत पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर निःशुल्क सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में प्रदेश में 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट सक्रिय हैं।
नस्ल सुधार के लिए उत्तर प्रदेश पशु प्रजनन नीति-2018 के तहत आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक के माध्यम से 90 प्रतिशत तक मादा संतति प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘मिशन मिलियन’ के अंतर्गत 10 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य है, जिसमें से 3 लाख से अधिक पूरे किए जा चुके हैं।
पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट के साथ पशुधन बीमा योजना लागू की गई है, जिसमें एक पशुपालक के 25 पशुओं तक को कवर किया जा रहा है। चारे की समस्या के समाधान के लिए 2024-2029 की चारा एवं पशु आहार नीति लागू की गई है, जिसके तहत गौशालाओं की भूमि पर हरा चारा उगाने के लिए 6.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गोकुल पुरस्कार और नंद बाबा पुरस्कार जैसी योजनाएं संचालित हैं, जिनके माध्यम से उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित किया जाता है। इससे पशुपालकों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति 2022 के तहत राज्य में 550 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। आगामी बजट 2026-27 में इसके लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश को डेयरी क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना भी संचालित की जा रही हैं।
सहकारी डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए पीसीडीएफ का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। साथ ही मेरठ, बांदा, झांसी और मथुरा में नए डेयरी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में हजारों नए गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने की योजना है, जिससे पशुपालकों को उनके गांव में ही दूध का उचित मूल्य मिल सके।
सरकार द्वारा ‘पराग’ ब्रांड के प्रचार-प्रसार और आधुनिक विपणन व्यवस्था के जरिए पशुपालकों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
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