शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहाँपुर में पंचायत सहायक कर्मचारियों का कलेक्टिव असंतोष अब कड़े आंदोलन का कमान रूप लेने लगा है। आधिकारिक फाइल 1000020612.jpg और हस्ताक्षर युक्त सहयोगी फाइल 1000020613.jpg से प्राप्त विलेख के अनुसार, 'पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन' (जनपद शाखा-शाहजहाँपुर) ने प्रदेश के पंचायती राज विभाग के निदेशक तथा जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को संबोधित एक कड़ा मांग पत्र प्रेषित किया है[span_0](start_span)[span_0](end_span)। इस विलेख में संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी जायज मांगों पर कलेक्टिव सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर के समस्त पंचायत सहायक 15 जून 2026 से लखनऊ स्थित ईको गार्डन में कमान शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे[span_1](start_span)[span_1](end_span)।
यूनियन के पदाधिकारियों ने विलेख में स्पष्ट किया है कि ग्राम पंचायत सचिवालयों के कलेक्टिव संचालन, डिजिटल सेवाओं के सुचारू क्रियान्वयन और विभिन्न सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में पंचायत सहायक रीढ़ की हड्डी की तरह कमान कार्य कर रहे हैं[span_2](start_span)[span_2](end_span)। इसके बावजूद आज तक न तो उन्हें स्पष्ट सेवा नियमावली दी गई है और न ही कार्य के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय उपलब्ध कराया गया है[span_3](start_span)[span_3](end_span)। इसी कलेक्टिव पीड़ा को लेकर संगठन ने 14 सूत्रीय मांगों का विलेख तैयार किया है[span_4](start_span)[span_4](end_span)।
1. 💰 मानदेय में भारी वृद्धि: वर्तमान ₹6000 प्रति माह के अत्यंत अल्प मानदेय को बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समकक्ष ₹30,000 प्रति माह किया जाए अथवा न्यूनतम कुशल मजदूरी दर लागू हो[span_5](start_span)[span_5](end_span)।
2. 📄 स्थायी सेवा नियमावली: अनुबंध आधारित व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर पंचायत सहायकों की स्थायी एवं स्पष्ट सेवा नियमावली बनाई जाए[span_6](start_span)[span_6](end_span)।
3. 🏥 सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य: समस्त पंचायत सहायकों को 'आयुष्मान भारत योजना' से आच्छादित करते हुए उनके आयुष्मान कार्ड जारी किए जाएं[span_7](start_span)[span_7](end_span)।
4. 🖥️ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: पंचायत सहायकों के लिए पृथक "पंचायत सहायक पोर्टल" का विकास हो तथा सचिवालयों में आवश्यक फर्नीचर, कंप्यूटर, प्रिंटर और इंटरनेट व्यय का मासिक बजट मिले[span_8](start_span)[span_8](end_span)।
5. 🛑 गैर-विभागीय कार्यों पर रोक: पंचायत सहायकों से लिए जा रहे अन्य विभागों के गैर-विभागीय कलेक्टिव कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए[span_9](start_span)[span_9](end_span)।
6. 💼 भर्तियों में आरक्षण: ग्राम विकास अधिकारी (VDO) एवं ग्राम पंचायत अधिकारी (VPO) की सीधी भर्तियों में पंचायत सहायकों को 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाए[span_10](start_span)[span_10](end_span)।
| 👤 पदाधिकारी का नाम व कमान पद | 📞 कलेक्टिव संपर्क सूत्र | 🎯 संगठनात्मक कमान भूमिका |
|---|---|---|
| बृजेश कुमार मिश्रा (प्रदेश अध्यक्ष) | Mob- 9598881696 | राज्य स्तरीय कलेक्टिव मार्गदर्शन[span_11](start_span)[span_11](end_span) |
| हीरा लाल वर्मा (जिला अध्यक्ष, शाहजहाँपुर) | Mob- 8923964226 | जनपद कमान विलेख का क्रियान्वयन[span_12](start_span)[span_12](end_span) |
| पूजा देवी (जिला उपाध्यक्ष) | Mob- 8009824740 | महिला पंचायत कर्मियों का कलेक्टिव नेतृत्व[span_13](start_span)[span_13](end_span) |
| सोविन्दर कुमार (जिला महामंत्री) | Mob- 9621776902 | प्रशासनिक विलेख एवं कमान समन्वय[span_14](start_span)[span_14](end_span) |
मांग पत्र में संगठन की अन्य कोर टीम जैसे शिव कुमार पाल (जिला कोषाध्यक्ष- 9643076344), अपूर्वा पाण्डेय (जिला मीडिया प्रभारी- 9235988921), अमित कुमार (जिला सचिव- 7007261505) और दीक्षा देवी (जिला उपसचिव- 8303831974) के कलेक्टिव कमान प्रयासों को भी रेखांकित किया गया है[span_15](start_span)[span_15](end_span)। इसके अतिरिक्त, सहयोगी फाइल 1000020613.jpg में जनपद के विभिन्न ब्लाकों जैसे निगोही, खुदागंज, जैतीपुर, खुटार, सिधौली, कांट, बांदा तथा मिर्जापुर के सैकड़ों कमान पंचायत सहायकों ने अपने हस्तलिखित हस्ताक्षर कर इस विलेख को अपना कलेक्टिव समर्थन दिया है।
"यदि निर्धारित अवधि (एक सप्ताह) के भीतर हमारी न्यायोचित मांगों पर कोई संतोषजनक कलेक्टिव कार्रवाई नहीं की जाती है, तो उत्पन्न होने वाली समस्त विषम परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।" - पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन[span_16](start_span)[span_16](end_span)
'सच की आवाज' वेब न्यूज के माध्यम से स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव ने इस कमान विलेख का विश्लेषण करते हुए बताया कि यदि 15 जून से यह कलेक्टिव हड़ताल शुरू होती है, तो उत्तर प्रदेश की डिजिटल विलेख व्यवस्था और ग्रामीण सचिवालयों का कामकाज पूरी तरह ठप हो सकता है। अब देखना यह है कि पंचायती राज विभाग इस कड़े अल्टीमेटम पर क्या विलेखीय कदम उठाता है।
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