Breaking News

भूगर्भ जल विभाग प्रदेश की भू-संपदा का संरक्षण कर रहा है



स्टेट ब्यूरो प्रमुख जेन सिंह यादव, उत्तर प्रदेश

10 मार्च 2026।
प्रदेश में भूगर्भ जल विभाग द्वारा भूगर्भ जल विभाग द्वारा संरक्षण, प्रबंधन एवं विकास हेतु व्यापक कार्य किये जा रहे हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2004 में भूगर्भ जल विभाग पर नियंत्रण के लिए प्रदेश के भूगर्भ संपदा सर्वेक्षण, अनुसंधान, अनुसंधान, विकास एवं प्रबंधन तथा जल दोहन के लिए मान्यता एजेंसी की घोषणा की थी। विभाग द्वारा भंडार संरक्षण, संचयन और विभिन्न अभिलेखों द्वारा संचालित गोदाम संरक्षण और अनुश्रवण का कार्य भी जारी है।

भूगर्भ जल विभाग के प्रमुख कार्यकलापों में प्रदेश के भूगर्भ सम्पदा का सर्वेक्षण, सर्वेक्षण, प्रबंधन एवं प्रशिक्षण के साथ-साथ संबंधित सहयोगियों का वैज्ञानिक अध्ययन शामिल है। इसके अतिरिक्त शैल दोहन पर, नियंत्रण संरक्षण और लैपटॉप नामांकन का तकनीकी सहयोग एवं अनुश्रवण भी विभाग का महत्वपूर्ण सारांश शामिल है।

प्रदेश के 75 जिलों के 826 विकास खंडों के 31 मार्च 2025 तक के आंकड़ों पर आधारित नवीनतम चित्र संसाधनों के अनुसार 44 विकास खंडों को अतिदोहित, 48 विकास खंडों को क्रिटिकल, 171 विकास खंडों को सेमी क्रिटिकल और 563 विकास खंडों को सुरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में ग्रामीण शहरी एवं क्षेत्रीय स्तर पर मापन के तहत प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया गया। साथ ही 184 अक्रियाशील पेजोनॉमर के स्थान पर नए पेजोमीटर की स्थापना की गई तथा 200 अभ्यारण्य पेजोमीटर की स्थापना एवं अनुरक्षण का कार्य भी शत-प्रतिशत पूरा किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 233 नए पेजोमीटर स्थापित करने के लक्ष्य के सापेक्ष 233 पेजोमीटर स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं तथा 200 पेजोमीटर के निर्धारण का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।

भूजल के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य प्रदेश के सभी 75 जिलों में 15 से 22 जुलाई के बीच "भूजल सप्ताह" का आयोजन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी 16 से 22 जुला

ई 2025 तक पूरे प्रदेश में कृषक सप्ताह मानकर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

इसके अलावा बुन्देलखंड क्षेत्र में जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए 20 अगस्त 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार और इजराइल के जल संसाधन मंत्रालय के बीच "प्लान ऑफ को-ऑपरेशन" पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत भारत-इज़राइल बुंदेलखंड वॉटर प्रोजेक्ट लागू किया गया है, जिसके माध्यम से उन्नत कृषि तकनीक और इंटीग्रेटेड ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से जल उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत बुंदेलखंड क्षेत्र के 26 ग्रामों को शामिल किया जा रहा है, जिसमें इजराइल द्वारा सुझाए गए आधुनिक तकनीक के आधार पर ठोस पक्ष बनाने का काम किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट के प्रथम चरण में हस्ताक्षर इजराइली कंपनी द्वारा फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर प्रेजेंटेशन की जा चुकी है, जिसे मंज़ूरी मिल गई है। इसके साथ ही जौनपुर जिले के बड़ागांव विकास खंड के ग्राम गंगावली में मिनी पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, जिस पर मंज़ूरी के बाद ई-निविदा प्रक्रिया का पूरा अनुबंध भी लिया गया है।

प्रदेश में अटल नक्षत्र योजना के तहत 88 अतिदोहित एवं क्रिटिकल विकास खंडों में वॉटर सोलर योजना विकसित की जा रही है। इसके अंतर्गत 88 मध्यम दूरी के पेजोमीटर स्थापित करने के लक्ष्य के सापेक्ष 4 पेजोमीटर स्थापित किये जा चुके हैं तथा शेष कार्य प्रगति पर है। साथ ही इन विकास खंडों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए 56 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी आवश्यक उत्खनन की जा रही है।

Post a Comment

0 Comments