मानवाधिकारों पर चयनात्मक नहीं, सिद्धांत आधारित दृष्टिकोण जरूरी: डॉ. राजेश्वर सिंह

 

ब्यूरो रिपोर्ट: शशांक मिश्रा, लखनऊ 

लखनऊ। होली और रमजान के बीच देशभर में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर हो रही प्रतिक्रियाओं के बीच लखनऊ में भी ईरान से जुड़े मामलों पर प्रदर्शन देखने को मिले। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने ऐसे प्रदर्शनों की निंदा की है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन मानवाधिकारों के मुद्दे पर दृष्टिकोण सिद्धांत आधारित होना चाहिए, न कि चयनात्मक।

डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि जब ईरान में बाल विवाह की आयु को लेकर विवाद हुआ और छात्राओं ने विरोध किया, तब वैश्विक स्तर पर उतनी आवाज़ क्यों नहीं उठी। इसी तरह अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों पर प्रतिबंध के दौरान व्यापक विरोध क्यों नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि आज कुछ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर तीव्र प्रतिक्रिया दी जा रही है, लेकिन जरूरी है कि हर अन्याय के खिलाफ समान संवेदनशीलता दिखाई जाए।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकार सार्वभौमिक होते हैं और नारी सम्मान व युवाओं के जीवन का महत्व किसी सीमा या देश से कम नहीं आंका जा सकता।

उन्होंने कहा कि चयनात्मक आक्रोश से विश्वसनीयता कमजोर होती है, जबकि निष्पक्ष और सिद्धांत आधारित दृष्टिकोण ही सच्ची नैतिकता की पहचान है।


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