पप्पू कुमार चौहान, ब्यूरो रिपोर्ट सीतापुर ✍️
सीतापुर। Sitapur जिले के Sakran क्षेत्र में बाल विकास परियोजना कार्यालय को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सीडीपीओ सकरन के कथित भ्रष्ट रवैये के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को समय से पोषण नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी भर्ती, पोषण सामग्री के उठान व वितरण तथा सहायिकाओं की पदोन्नति में भी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा अभी तक कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया गया है।
ग्राम पंचायत मोहारी के करीब दर्जन भर ग्रामीणों ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि पिछले अगस्त माह से बच्चों को पोषण सामग्री नहीं दी गई है और कई आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से नहीं खुलते। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने वाले लोगों को ही बाद में बुलाकर पोषण सामग्री दे दी जाती है, जिससे कागजों में वितरण दिखाया जा सके।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से अवैध वसूली की जा रही है, जिसके चलते पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सीडीपीओ सकरन पर आती है।
वहीं ग्राम पंचायत कम्हरिया महरिया में कथित रूप से अपात्र व्यक्ति का चयन किए जाने और बिना दस्तावेज सत्यापन के पदोन्नति देने के भी आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पदोन्नति पाने वाली महिला की शैक्षिक योग्यता भी संदेह के घेरे में है।
क्षेत्रवासियों के मुताबिक ताजपुर सलौली, सेमराकला और पटना जैसे कई आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहते हैं, जबकि मोहलिया, मोहारी, अदवारी, देवरिया खुर्द, मदनापुर, नसीरपुर और रसूलपुर जैसे केंद्रों पर पोषण वितरण नियमित नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ हो रहा खिलवाड़ जारी रहेगा।
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