स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव उत्तरप्रदेश ✍🏻
शाहजहांपुरः 05 अप्रैल, 2026
हमारे संविधान और उसकी प्रस्तावना में, मूल अधिकार, मूल कर्तव्य और नीति निर्देशक तत्वों में भी नागरिकों की समानता निहित हैं, जिसके फलस्वरूप इस देश में लैंगिक भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। संविधान न केवल महिलाओं को समानता का अधिकार देता है, बल्कि राज्यों को यह अधिकार देता है कि समानता लाने के लिए वह महिलाओं के प्रति सकारात्मक विभेदीकरण की योजनायें बना सकते हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में महिलाओं को विभिन्न विकास सम्बन्धी कार्यक्रमों से सम्बद्ध करके उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति सुधारने में मदद करने के उद्देश्य से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने महिला सशक्तीकरण मिशन के अन्तर्गत महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए कई योजनायें संचालित कर उनका उत्थान किया है।
इस योजना का उद्देश्य महिलाओं से सम्बन्धित विभिन्न मुद्दों जैसे—घरेलू हिंसा, दहेज, शिक्षा, स्वास्थ्य, अधिकार, जेंडर, यौन हिंसा आदि के संबंध में जागरूकता लाना है। ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करना इसका मुख्य लक्ष्य है।
इस योजना के अन्तर्गत महिलाओं को योजनाओं की जानकारी देना, उनका लाभ दिलाना, अधिकारियों को संवेदनशील बनाना तथा लैंगिक समानता के लिए जागरूकता अभियान चलाना शामिल है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 51 हजार से अधिक गतिविधियों के माध्यम से 56 लाख से अधिक महिलाओं व बालिकाओं को जागरूक किया गया है।
कामकाजी महिलाओं को शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित और सस्ती आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना संचालित है। प्रदेश के कई जनपदों जैसे लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद आदि में कुल 13 सखी निवास बनाए जा रहे हैं, जिनमें से कुछ का संचालन प्रारम्भ हो चुका है।
मिशन शक्ति की उप योजना के अंतर्गत संचालित इस योजना में पीड़ित एवं जरूरतमंद महिलाओं को आश्रय, सुरक्षा और सहायता प्रदान की जाती है। प्रदेश के कई जनपदों में शक्ति सदनों का संचालन शुरू हो चुका है।
जनपद मथुरा (वृन्दावन) में निराश्रित महिलाओं के लिए 1000 क्षमता वाला आश्रय सदन संचालित है। यहाँ महिलाओं को निःशुल्क भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा और काउंसिलिंग उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में यहाँ 386 से अधिक महिलाएं निवासरत हैं।
प्रदेश में संचालित इन शरणालयों में घरेलू हिंसा, कानूनी मामलों एवं अन्य समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को आश्रय दिया जाता है। यहां उन्हें भरण-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, वस्त्र और कौशल विकास प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में संचालित शरणालयों में 248 महिलाएं एवं उनके 24 बच्चे निवासरत हैं।
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