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शाहजहाँपुर: गुदड़ी बाजार का चर्चित किरायेदारी विवाद समाप्त; रिटायर्ड...

 

⚖️ विधिक सुशासन कीर्तिमान / हाईकोर्ट आदेश प्रवर्तन
✍️ स्टेट ब्यूरो हेड: योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश
📅 शाहजहाँपुर | 26 मई, 2026
🌐 सच की आवाज वेब न्यूज — न्यायिक सुशासन विशेष: माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कड़े रुख के आगे झुका किरायेदार मनीष खन्ना, न्यायालय पटल पर सौंपी विवादित परिसर की चाबी

शाहजहाँपुर। नागरिकों के विधिक संपत्ति अधिकारों के संरक्षण, अवैध या जबरन कब्जों के विसंगतिपूर्ण सिंडिकेट को समूल ध्वस्त करने तथा न्यायपालिका की सर्वोच्चता स्थापित करने की दिशा में कलेक्ट्रेट अंचल के गुदड़ी बाजार क्षेत्र में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। शहर के बहुचर्चित और लंबे समय से विचाराधीन गुदड़ी बाजार किरायेदारी विवाद विलेख में आखिरकार सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी **श्री विजय कुमार देवल** को माननीय उच्च न्यायालय (High Court) इलाहाबाद से अभेद्य और ऐतिहासिक विधिक राहत मिल गई है। उच्च न्यायालय के कड़े सुशासनात्मक निर्देशों और याचिका खारिज होने के उपरांत किरायेदार को विवादित व्यावसायिक प्रतिष्ठान खाली करना पड़ा और उसने विधिक मर्यादा के तहत न्यायालय पटल पर दुकान की चाबी प्रस्तुत कर दी है।

🏪 एससीसी वाद संख्या 10/2015 के विलेखीय साक्ष्यों के आधार पर हुआ अंतिम फैसला:

प्राप्त प्रामाणिक विलेखीय प्रविष्टि के अनुसार, मुख्य व्यावसायिक हब गुदड़ी बाजार स्थित उक्त दुकान को लेकर सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी विजय कुमार देवल एवं **श्रीमती ममता रानी** द्वारा डिफाल्टर किरायेदार मनीष खन्ना के विरुद्ध **एससीसी वाद संख्या 10/2015** न्यायालय के समक्ष दायर किया गया था। इस नोडल वाद में लंबे समय से लंबित पड़े बकाया किराये की वसूली, गैर-कानूनी तरीके से रोके गए अधिभोग से बेदखली तथा अन्य विधिक राहतों की मांग की गई थी। यह मुकदमा वर्षों से विभिन्न न्यायालयों के सर्विलांस रोस्टर में विचाराधीन था।

📜 लघु वाद न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक विधिक यात्रा चार्ट:
📊 अधीनस्थ न्यायालयों की कमान प्रविष्टि एवं आदेश ⚖️ माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद का अंतिम विलेख
लघु वाद न्यायालय निर्णय: ०३ अक्टूबर २०२४ को मकान मालिक के पक्ष में बेदखली का कड़ा आदेश पारित।
अपर जिला न्यायाधीश ऐक्शन: एडीजे कोर्ट संख्या-६, शाहजहाँपुर द्वारा किरायेदार मनीष खन्ना का पुनरीक्षण वाद पूर्णतः निरस्त।
साक्ष्य विलेख आधार: अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा पारित पूर्व आदेश पूर्णतः विधिक एवं साक्ष्य सम्मत प्रमाणित।
किरायेदार की याचिका खारिज: उच्च न्यायालय ने निचली अदालतों के बेदखली आदेश में हस्तक्षेप योग्य त्रुटि नहीं मानी।
अल्टीमेटम टाइमलाइन: आरोपी को दो सप्ताह के भीतर संपूर्ण बकाया किराया शासकीय व निजी नोडल पटल पर जमा करने के निर्देश।
शांतिपूर्ण कब्जा सुपुर्दगी: निर्धारित समय सीमा के भीतर दुकान खाली कर कब्जा स्वामी को सौंपने का विधिक आदेश।
🛡️ साक्ष्यों के आधार पर अदालतों ने माना सही हक; दो सप्ताह की मोहलत के बाद खाली हुई दुकान:

किरायेदार मनीष खन्ना ने अधीनस्थ अदालतों के बेदखली आदेश को विसंगतिपूर्ण बताते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती देने की अमर्यादित विलेख चेष्टा की थी। किंतु माननीय उच्च न्यायालय ने उपलब्ध विलेख साक्ष्यों का पारदर्शी मूल्यांकन करते हुए स्पष्ट किया कि मकान मालिक पक्ष के विधिक दावे और साक्ष्य अटूट हैं। उच्च न्यायालय द्वारा याचिका निरस्त करते हुए दो सप्ताह के भीतर परिसर को खाली करने और शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने के सख्त रुख के बाद, किरायेदार ने अंततः न्यायालय पटल पर दुकान की चाबियां समर्पित कर दीं, जिससे लंबे समय से चल रहा विवाद विधिक रूप से निष्पादित हो गया।

किरायेदारी की आड़ में वर्षों तक संपत्ति दबाने की विसंगतिपूर्ण प्रवृत्ति पर उच्च न्यायालय का करारा प्रहार

"गुदड़ी बाजार का यह एससीसी वाद (SCC Case) शाहजहाँपुर कलेक्ट्रेट व न्यायिक अंचल के लिए नजीर है। उच्च न्यायालय का यह पारदर्शी निर्णय यह सिद्ध करता है कि कोई भी व्यक्ति किरायेदारी समझौतों की आड़ लेकर वास्तविक भू-स्वामी या सेवानिवृत्त लोक सेवकों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। वर्षों तक अदालतों को गुमराह करने और बकाया राजस्व दबाने की प्रवृत्तियों को न्यायपालिका कतई संरक्षण नहीं देगी। कानून व्यवस्था और सुशासन का मूल सिद्धांत यही है कि साक्ष्यों के आधार पर जिसका विधिक हक है, उसे कस्टडी ससमय प्राप्त होनी चाहिए। इस आदेश के बाद कलेक्ट्रेट सिविल अभियोजन विंग को और मजबूती मिलेगी।" — कलेक्ट्रेट बार समन्वय विलेख बुलेटिन

गुदड़ी बाजार मुख्य व्यापार प्रभाग, चौक कोतवाली अंचल, कलेक्ट्रेट कचहरी परिसर, सदर बाजार लिंक मार्ग, जनसुनवाई मंचों और स्थानीय सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के सम्मानित अधिवक्ताओं, विभिन्न व्यापारिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लंबे समय के बाद आए इस पारदर्शी, कड़क और निष्पक्ष विधिक निर्णय की खुले दिल से सराहना की है। कलेक्ट्रेट बार के अधिवक्ताओं ने कहा कि इस निस्तारण से क्षेत्र में अनावश्यक मुकदमों के बोझ से राहत मिलेगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं स्थानीय कमान सेल ने पुनः संपूर्ण दुकान मालिकों व सम्भ्रांत किरायेदारों से विधिक व विनम्र अपील की है कि वे किसी भी व्यावसायिक परिसर को किराये पर देते अथवा लेते समय शासन द्वारा निर्धारित विलेख प्रपत्रों, एग्रीमेंट नोटरी रोस्टर और रेंट कंट्रोलर अधिनियम के नोडल नियमों का अक्षरशः पालन करें। विवाद की स्थिति में आपसी रंजिश या अवैध कब्जों जैसी अमर्यादित विसंगतियों से दूर रहकर सीधे सक्षम न्यायालय या विधिक मध्यस्थता मंचों का आश्रय लें। आपकी विधिक सजगता ही सुशासित अखंड समाज की अभेद्य ढाल है।

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📈 उत्कृष्ट न्यायिक सुशासन, पारदर्शी कीर्तिमान — भू-विसंगतियों का समूल विधिक अंत, व्यापारिक अंचलों का सतत विलेखीय सर्विलांस और प्रत्येक नागरिक के जान-माल व विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सदैव समर्पित 'सच की आवाज'।

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