बलरामपुर। अदम्य साहस, फौलादी संकल्प, कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर ५,३६४ मीटर ऊंचे **एवरेस्ट बेस कैंप (Everest Base Camp)** पर तिरंगा फहराकर वैश्विक पटल पर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करने वाली बलरामपुर की होनहार बेटियों का गृह जनपद आगमन पर ऐतिहासिक विधिक व भव्य स्वागत किया गया। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह में जिलाधिकारी **डॉ. विपिन कुमार जैन** एवं मुख्य विकास अधिकारी (CDO) द्वारा संयुक्त रूप से इन जांबाज छात्राओं और उनकी मार्गदर्शक खेल प्रशिक्षक को विधिक प्रमाण-पत्र व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में बेटियों के कदम रखते ही समूचा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
जनपद के सुदूर ग्रामीण व शहरी अंचलों के सरकारी स्कूलों से निकलीं इन बेटियों ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती। फतह करने वाली टीम में **कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (KGBV) पचपेड़वा** की साहसी छात्रा **नीलांशु**, **डीएवी इंटर कॉलेज** की छात्रा **प्रियंका उपाध्याय**, **कंपोजिट विद्यालय रामनगरा** की होनहार छात्रा **प्रियंका प्रजापति** तथा स्पोर्ट्स स्टेडियम बलरामपुर की जांबाज हैंडबॉल प्रशिक्षक **हिना खातून** शामिल रहीं।
| 🗻 एवरेस्ट ट्रैक की दुर्गम विसंगतियां व अनुभव | 📚 जिला प्रशासन बलरामपुर का विधिक प्रोत्साहन |
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• शून्य से नीचे का तापमान: हाड़ कंपाने वाली माइनस डिग्री ठंड के बीच ट्रैकिंग। • ऑक्सीजन की भारी कमी: उच्च तुंगता (High Altitude) वाले क्षेत्रों में कम वायुदाब का सामना। • तिरंगे का जज्बा: देश का मान बढ़ाने के दृढ़ संकल्प से नामुमकिन लक्ष्य को मुमकिन किया। |
• 'एवरेस्ट डायरी' का प्रकाशन: सफर के दौरान छात्राओं द्वारा लिखे संस्मरणों को जिला प्रशासन पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवाएगा। • प्रमाण-पत्र व विधिक सम्मान: कलेक्ट्रेट पटल पर खेल विभाग के नोडल समन्वय से भविष्य की विधिक खेल छात्रवृत्ति का मार्ग प्रशस्त। |
कलेक्ट्रेट सभागार में जनसंवाद स्थापित करते हुए जांबाज बेटियों ने अपने रोमांचक, पथरीले और रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभवों को पटल पर साझा किया। छात्राओं ने बताया कि जैसे-जैसे वे ऊंचाई की ओर बढ़ रही थीं, बेहद संकरे बर्फीले रास्तों, ग्लेशियरों की विसंगतियों और ऑक्सीजन के घटते स्तर ने उनकी शारीरिक विधिक परीक्षा ली। लेकिन उनके मन में केवल एक ही स्वप्न था—एवरेस्ट के मुहाने पर भारत का गौरवशाली राष्ट्रीय ध्वज फहराना। इस गर्व के ऐतिहासिक क्षण में समस्त लाभांवित छात्राओं ने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को एवरेस्ट बेस कैंप के शिखर पर तिरंगा लहराते हुए अपनी एक विशेष फ्रेम की गई ऐतिहासिक फोटो सप्रेम भेंट की।
"बलरामपुर के सरकारी स्कूलों और कस्तूरबा विद्यालयों में पढ़ने वाली ग्रामीण अंचलों की बालिकाओं ने हिमालय की ऊंचाइयों को फतह कर यह विधिक रूप से सिद्ध कर दिया है कि बेटियों के लिए कोई भी सीमा अभेद्य नहीं है। इन्होंने न केवल अपने माता-पिता का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है। इनकी डायरी को राजकीय खजाने से पुस्तक रूप में मुद्रित कराकर जिले के प्रत्येक विद्यालय की लाइब्रेरी में रखवाया जाएगा ताकि हर बेटी बड़े सपने देख सके। जिला प्रशासन इन वीरांगनाओं के आगामी उच्च पर्वतारोहण अभियानों की समस्त विधिक व वित्तीय व्यवस्थाओं का निर्वहन पूरी संवेदनशीलता के साथ करेगा।" — जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन
इस भावुक सम्मान समारोह के दौरान सभागार में उपस्थित छात्राओं के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। अपनी बेटियों के इस वैश्विक कीर्तिमान और कलेक्ट्रेट पटल पर मिले राजकीय सम्मान से वे स्वयं को अत्यधिक गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। समारोह के अंतिम सत्र में मुख्य विकास अधिकारी, जिला बुनियादी शिक्षा अधिकारी (BSA), खेल विभाग के नोडल खेल अधिकारी तथा युवा कल्याण विंग के जिला स्तरीय प्रतिनिधियों ने भी उपस्थित होकर चारों जांबाज विनर वीरांगनाओं के उज्ज्वल एवं स्वर्णिम भविष्य की विधिक कामना की।
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