शाहजहाँपुर। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने, कलेक्ट्रेट गंगा स्वच्छता ग्रिड को मजबूत बनाने तथा लुप्तप्राय जलीय जीवों के विधिक संरक्षण को एक व्यापक जनआंदोलन का रूप देने हेतु जनपद में एक सराहनीय पहल की गई है। 'विश्व कछुआ दिवस' के पावन व विशेष अवसर पर आज वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) इंडिया एवं जिला गंगा समिति के संयुक्त तत्वावधान में वन विभाग स्थित मुख्य गंगा सभागार में एक भव्य कार्यशाला एवं जागरूकता संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस महा-संगोष्ठी में पर्यावरणविदों, वन विभाग के आला अधिकारियों, फील्ड प्रभारियों तथा विभिन्न प्रबुद्ध स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया तथा जैव विविधता को अक्षुण्ण बनाए रखने का विधिक संकल्प लिया।
संगोष्ठी पटल पर कमान संभाल रहे WWF इंडिया के परियोजना अधिकारी श्री रामावतार निषाद ने जनपद शाहजहाँपुर के जलीय रूटों में कछुआ संरक्षण हेतु संचालित रीयल-टाइम गतिविधियों का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कृषकों व नदी तट के ग्रामीणों से विशेष अपील की कि खेतों के किनारों पर पाए जाने वाले कछुओं के अंडों को विसंगतिपूर्ण विनाश से बचाकर उनके प्राकृतिक संरक्षण में कलेक्ट्रेट विंग का सहयोग करें। उन्होंने जनपद में पाई जाने वाली दो अत्यंत महत्वपूर्ण व दुर्लभ प्रजातियों **'इंडियन टेन्ट कछुआ'** एवं **'इंडियन रूफ्ड कछुआ'** के पारिस्थितिकी महत्व पर प्रकाश डालते हुए इन्हें नदियों का 'प्राकृतिक सफाई नायक' निरूपित किया।
| 📊 वैधानिक कस्टडी एवं तकनीकी विंग | 🏛️ सामुदायिक समावेशन एवं राजकीय प्रोत्साहन |
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• विधिक नियामक: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत फील्ड स्टाफ का सर्विलांस अपग्रेडेशन। • तकनीकी नोडल कमान: उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. सुशील कुमार द्वारा विधिक दायित्वों का बिंदुवार प्रस्तुतिकरण। • हैचरी हॉटस्पॉट: विकास खंड जलालाबाद के ग्राम गोरा में स्थापित अस्थायी हैचरी केंद्र। |
• सांस्कृतिक विलेख: सहकार भारती के अभिनव कश्यप द्वारा कछुए को भगवान विष्णु के कूर्मावतार से जोड़कर सामाजिक चेतना पर बल। • विशेष सम्मान: गोरा हैचरी के संरक्षक रंजीत को उत्कृष्ट विलेख कार्यों हेतु मंच पर विधिक रूप से सम्मानित किया गया। • नया कीर्तिमान अवार्ड: उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों हेतु 'कछुआ संरक्षण अवार्ड' की आधिकारिक घोषणा। |
कार्यक्रम के अंतर्गत सभी प्रतिभागियों ने रेंज कार्यालय परिसर में निर्मित अत्याधुनिक स्थायी नर्सरी का स्थलीय अवलोकन किया। वहाँ उपस्थित तकनीकी विंग ने प्रविष्टि चार्ट के माध्यम से प्रदर्शित किया कि किस प्रकार कछुआ शावकों (Hatchlings) का कृत्रिम व प्राकृतिक विधा से सुरक्षित संरक्षण, कृंतक रोधी कस्टडी और पालन-पोषण कर उन्हें पुनः नदियों में विमुक्त किया जाता है। जिला परियोजना अधिकारी **डॉ. विनय कुमार सक्सेना** ने इसके ऐतिहासिक संदर्भों को पटल पर रखा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित समस्त अधिकारियों व सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों ने पर्यावरण व जैव विविधता के अभेद्य संरक्षण की सामूहिक विधिक शपथ ग्रहण की।
"कछुए हमारी नदियों और तालाबों के प्राकृतिक 'इंजीनियर' हैं, जो पानी की गंदगी का जैविक शोधन करते हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत कछुओं का अवैध शिकार या व्यापार एक जघन्य और गैर-जमानती विधिक अपराध है। हमारा मुख्य विज़न केवल विभागीय कस्टडी तक सीमित नहीं है, बल्कि जलालाबाद के गोरा गांव की तर्ज पर प्रत्येक नदी तटीय ग्राम पंचायत में सामुदायिक कमान स्थापित करना है। जो वन कर्मी या ग्रामीण इस पुनीत सर्विलांस कार्य में उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित करेंगे, उन्हें विभाग की ओर से बकायदा 'कछुआ संरक्षण अवार्ड' से नवाजा जाएगा। वन संपदा और वन्यजीवों के अभेद्य संरक्षण हेतु संपूर्ण शाहजहाँपुर प्रशासन पूरी निष्ठा से मुस्तैद है।" — प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) श्री सचिन कुमार
जलालाबाद सर्किल, गोरा ग्राम अंचल, रामगंगा व गर्रा नदी बेल्ट, पुवायाँ और कलेक्ट्रेट जनसुनवाई मंचों से जुड़े स्थानीय सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, सम्मानित जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध पर्यावरणविदों ने वन प्रभाग के इस पारदर्शी, चेतनामूलक और दंडात्मक सर्विलांस रोडमैप की खुले दिल से सराहना की है। इस महा-अभियान को सफल बनाने में वन विभाग और जिला गंगा समिति के नोडल स्तंभों—सहित **हिंमाशु सक्सेना**, **राजपाल**, **रंजीत**, **आदेश** एवं **अरविन्द सक्सेना** सहित दर्जनों जागरूक कमान कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। वन प्रभाग ने पुनः जनपदवासियों से विधिक अपील की है कि यदि अंचल में कहीं भी कछुओं के अवैध शिकार, तस्करी या तटीय क्षेत्रों में अंडों के विसंगतिपूर्ण विनाश की भनक लगे, तो इसकी तत्काल प्रामाणिक सूचना वन विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर अथवा स्थानीय कलेक्ट्रेट आपदा कंट्रोल रूम पर प्रेषित करें। सूचना देने वाले सजग नागरिक की पहचान विधिक रूप से पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी।
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