सीतापुर। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता, उच्च गुणवत्ता और विधिक मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन बेहद सख्त हो गया है। कसमंडा विकास खंड के अंतर्गत आने वाले सुदूर ग्रामीण अंचल हरदी-गोविंदापुर में गुरुवार को जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. राजा गणपति आर. द्वारा किए गए औचक स्थलीय विधिक निरीक्षण से लोक निर्माण और पंचायती राज विभाग के अमले में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान कसमंडा ब्लॉक के इस क्षेत्र में नव-निर्मित खड़ंजा मार्ग और इंटरलॉकिंग कार्य में भारी तकनीकी खामियां और अत्यंत घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग पाया गया, जिस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए मौके पर ही कड़े विधिक सुधारात्मक आदेश जारी किए।
ग्राउंड जीरो का विधिक व तकनीकी निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने पाया कि खड़ंजे के किनारों पर बनाई जा रही सड़क पटरी निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। मिट्टी के भराव और ईंटों की सोलिंग में की गई इस घोर लापरवाही को देखकर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) को विधिक रूप से आड़े हाथों लेते हुए कड़ी फटकार लगाई और तत्काल प्रभाव से घटिया कार्य को रोककर, तय विधिक समय-सीमा के भीतर दोबारा निर्माण कराने की विधिक संस्तुति दी।
| ⚠️ स्थलीय निरीक्षण में मिली विधिक खामियां | ⚖️ जिलाधिकारी द्वारा मौके पर दिए गए कड़े निर्देश |
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• घटिया निर्माण सामग्री: खड़ंजा सोलिंग में निर्धारित विधिक मानकों से इतर कम गुणवत्ता वाली ईंटों और मसाला मिश्रण का प्रयोग मिला। • पटरी निर्माण में दोष: हरदी-गोविंदापुर मार्ग की पटरियों का विधिक तकनीकी ढाल (स्लोप) और कंपैक्शन सही नहीं पाया गया, जिससे पहली बारिश में ही सड़क धंसने का विधिक खतरा था। |
• दोबारा निर्माण का आदेश: खामियों वाले संपूर्ण खड़ंजा पैच को विधिक रूप से उखाड़कर, सरकारी धन का सही विधिक उपयोग करते हुए नए सिरे से बनाने का आदेश। • जेई की विधिक जवाबदेही: संबंधित जूनियर इंजीनियर को स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर विधिक इस्टीमेट के अनुरूप जल्द से जल्द कार्य में सुधार कराने की अंतिम चेतावनी। |
जिलाधिकारी के इस कड़े विधिक तेवर से ग्रामीण विकास से जुड़े ठेकेदारों और तकनीकी अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जिलाधिकारी ने कसमंडा खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को भी विधिक निर्देश दिए हैं कि वे क्षेत्र में चल रहे अन्य विकास कार्यों, जैसे अंत्येष्टि स्थलों, पंचायत भवनों और मनरेगा के विधिक कार्यों की भी आकस्मिक जांच करें। डीएम ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण विकास के विधिक बजट में यदि कोई भी वित्तीय विसंगति या भ्रष्टाचार पाया गया, तो संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विधिक विभागीय एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
"ग्रामीण अंचलों में बनने वाली सड़कें और खड़ंजे वहाँ की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन होते हैं। कसमंडा के हरदी-गोविंदापुर में खड़ंजा कार्य में विधिक व तकनीकी मानकों की जो अनदेखी की गई है, वह अत्यंत गंभीर है। ठेकेदारों और तकनीकी अधिकारियों को यह विधिक रूप से समझना होगा कि जनता के टैक्स के पैसे की बंदरबांट किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। जो भी कार्य विधिक इस्टीमेट के अनुसार नहीं पाया जाएगा, उसका भुगतान विधिक रूप से रोक दिया जाएगा और संबंधित तकनीकी पर्यवेक्षक के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की जाएगी।"
हरदी-गोविंदापुर और आसपास की ग्राम पंचायतों के स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने कलेक्ट्रेट कमान के इस औचक विधिक और धरातलीय हस्तक्षेप की मुक्त कंठ से सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि आला अधिकारियों के खुद जमीन पर उतरने से ग्राम प्रधानों और विभागीय सांठगांठ से होने वाले भ्रष्टाचार पर विधिक व व्यावहारिक रूप से प्रभावी अंकुश लगेगा। कलेक्ट्रेट जनसुनवाई सेल ने भी आश्वस्त किया है कि इस सड़क के पुनर्गठन की विधिक रिपोर्ट आने वाले पाक्षिक अंतराल में कलेक्ट्रेट पटल पर प्रस्तुत की जाएगी।
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