उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भीषण गर्मी और तापमान में लगातार आ रहे उतार-चढ़ाव के कारण खरीफ व सामयिक फसलों में गंभीर कीट-रोगों के प्रकोप की प्रबल आशंका उत्पन्न हो गई है। इसे देखते हुए कृषि विभाग और मौसम वैज्ञानिकों ने प्रदेश के समस्त किसान भाइयों के हित में एक विस्तृत एवं प्रामाणिक सामयिक कीट-रोग रक्षा एडवाइजरी जारी की है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सही समय पर वैज्ञानिक और जैविक विधाओं से फसलों का प्रबंधन न किया गया, तो किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है। अन्नदाताओं की सुविधा हेतु फसलवार प्रमुख कीटों के लक्षण एवं उनके सटीक रासायनिक व जैविक उपचार का पूरा ब्योरा नीचे दिया जा रहा है।
🌽 1. मक्का की फसल (तना बेधक एवं फॉल आर्मी वर्म सुरक्षा):| कीट / रोग का नाम | 🛡️ वैज्ञानिक व विधिक प्रबंधन उपाय |
|---|---|
| फली की मक्खी | 5% प्रकोपित फली मिलने पर डाईमेथोएट 30 E.C. (1 लीटर) अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 S.L. (200 मिली) या एसिटामिप्रिड 20 W.P. (150 ग्राम) प्रति हेक्टेयर छिड़कें। |
| बंझा (स्टेरिलिटी मोजेक) | यह माइट द्वारा फैलता है। ग्रसित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें। प्रसार रोकने के लिए डाईमेथोएट 30 E.C. की 1 लीटर मात्रा 500-600 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। |
| फली छेदक (सुंडी) |
• जैविक: खेत के चारों ओर गेंदे के पौधे (ट्रैप क्रॉप) लगाएं। फूल बनते समय 5 गंधपाश (फेरोमोन ट्रैप) प्रति हेक्टेयर स्थापित करें। NPV (Ha) 2% A.S. की 250-300 L.E. मात्रा 250-300 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें। • रासायनिक: प्रति 10 पौधों पर 2 छोटी या 1 बड़ी सुंडी दिखने पर एथियन 50% E.C. (1.2 लीटर) या फ्लुर्वेडामाईड 39.35% S.C. (100 मिली) को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। |
"किसान भाइयों से विशेष अपील है कि वे बताई गई रासायनिक दवाओं को खरीदते समय उनकी निर्माण तिथि और प्रामाणिकता अवश्य जांच लें। छिड़काव हमेशा दोपहर के बाद (शाम के समय) शांत मौसम में करें, जब हवा की गति धीमी हो। जैविक और रासायनिक विधियों के इस समेकित तालमेल से न सिर्फ लागत घटेगी बल्कि आपकी फसलों का पूर्ण विधिक संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।"
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने सभी जिला कृषि अधिकारियों और राजकीय कृषि बीज भंडारों के प्रभारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखें। किसानों को किसी भी तकनीकी असुविधा या कीटों की गंभीर पहचान हेतु अपने क्षेत्रीय विकास खंड के कृषि रक्षा इकाई प्रभारी अथवा किसान कॉल सेंटर के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर पर तुरंत संपर्क स्थापित करना चाहिए।
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