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उत्तर प्रदेश: मौसम में उतार-चढ़ाव से फसलों पर कीट-रोग का संकट; कृषि विभाग ने...

 

🌾 कृषि एवं उन्नत किसान / आधिकारिक एडवाइजरी
✍️ स्टेट ब्यूरो हेड: योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश
📅 लखनऊ | 19 मई, 2026
🌐 सच की आवाज वेब न्यूज — अन्नदाता हित में विशेष प्रसार: कीट प्रबंधन, जैविक नियंत्रण एवं वैज्ञानिक दवाओं की प्रामाणिक संस्तुतियां

त्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भीषण गर्मी और तापमान में लगातार आ रहे उतार-चढ़ाव के कारण खरीफ व सामयिक फसलों में गंभीर कीट-रोगों के प्रकोप की प्रबल आशंका उत्पन्न हो गई है। इसे देखते हुए कृषि विभाग और मौसम वैज्ञानिकों ने प्रदेश के समस्त किसान भाइयों के हित में एक विस्तृत एवं प्रामाणिक सामयिक कीट-रोग रक्षा एडवाइजरी जारी की है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सही समय पर वैज्ञानिक और जैविक विधाओं से फसलों का प्रबंधन न किया गया, तो किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है। अन्नदाताओं की सुविधा हेतु फसलवार प्रमुख कीटों के लक्षण एवं उनके सटीक रासायनिक व जैविक उपचार का पूरा ब्योरा नीचे दिया जा रहा है।

🌽 1. मक्का की फसल (तना बेधक एवं फॉल आर्मी वर्म सुरक्षा):
  • तना बेधक कीट: यदि खेत में 10% 'मृत गोभ' (आर्थिक क्षति स्तर) दिखाई दे, तो तत्काल डाईमिथोएट 30% E.C. की 660 मिली मात्रा को 700 लीटर पानी में घोलकर अथवा नोवालुरोन 05.25% + इमामेक्टिन बेन्जोएट 0.9% S.C. की 1.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
  • फॉल आर्मी वर्म (खतरनाक कीट): इसके जैविक नियंत्रण हेतु खेत में प्रति हेक्टेयर 20-25 बर्ड पर्चर (पक्षी आश्रय) और 3-4 प्रकाश प्रपंच (लाइट ट्रैप) लगाएं। साथ ही 35-40 फेरोमोन ट्रैप स्थापित करें। अंडों की वृद्धि रोकने हेतु मित्र परजीवी जैसे ट्राईकोग्रामा प्रेटीओसस या टेलीनोमस रेमस के 50,000 अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से छोड़ें। रासायनिक उपचार के लिए ब्रोफ्लोनिलाइड 20% S.C. की 125 मिली या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 47.85% S.C. की 75 मिली मात्रा 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़कें।
🌿 2. अरहर की फसल (फली मक्खी, बंझा रोग एवं फली छेदक):
कीट / रोग का नाम 🛡️ वैज्ञानिक व विधिक प्रबंधन उपाय
फली की मक्खी 5% प्रकोपित फली मिलने पर डाईमेथोएट 30 E.C. (1 लीटर) अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 S.L. (200 मिली) या एसिटामिप्रिड 20 W.P. (150 ग्राम) प्रति हेक्टेयर छिड़कें।
बंझा (स्टेरिलिटी मोजेक) यह माइट द्वारा फैलता है। ग्रसित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें। प्रसार रोकने के लिए डाईमेथोएट 30 E.C. की 1 लीटर मात्रा 500-600 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
फली छेदक (सुंडी) जैविक: खेत के चारों ओर गेंदे के पौधे (ट्रैप क्रॉप) लगाएं। फूल बनते समय 5 गंधपाश (फेरोमोन ट्रैप) प्रति हेक्टेयर स्थापित करें। NPV (Ha) 2% A.S. की 250-300 L.E. मात्रा 250-300 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
रासायनिक: प्रति 10 पौधों पर 2 छोटी या 1 बड़ी सुंडी दिखने पर एथियन 50% E.C. (1.2 लीटर) या फ्लुर्वेडामाईड 39.35% S.C. (100 मिली) को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
🌱 3. मूंग एवं उर्द की फसल (पत्ती धब्बा व पीला चित्रवर्ण रोग):
  • सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग: लक्षण दिखते ही तत्काल मेटीरम 70% W.G. की 1.25 लीटर मात्रा या टेवूकोनाजोल 25.9% E.C. की 750 मिली मात्रा लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
  • पीला चित्रवर्ण (येलो मोजेक) रोग: प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़कर जमीन में दबा दें या जला दें। इस रोग की वाहक 'सफेद मक्खी' होती है, अतः इसकी निगरानी हेतु खेत में 6-8 स्टिकी ट्रैप (पीले चिपचिपे कार्ड) प्रति हेक्टेयर लगाएं। रासायनिक नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 E.C. (1 लीटर) या एजाडिरेक्टिन 0.15% E.C. (2.5 भंडार लीटर) 500-600 लीटर पानी में मिलाकर 10-15 दिन के अंतराल पर 2 से 3 बार आवश्यकतानुसार छिड़काव करें।
🪵 4. गन्ने की फसल (कैंसर कहे जाने वाले 'लाल सड़न रोग' से बचाव):
निवारक उपाय: गन्ने के लाल सड़न रोग (Red Rot) से बचाव के लिए हमेशा रोग प्रतिरोधी उन्नत किस्मों के बीजों का ही चयन करें। रोगग्रस्त फसल की पेड़ी (Retruning) कतई न रखें।
बीज शोधन (बुवाई पूर्व): गन्ने के टुकड़ों को बोने से पहले काबेन्डाजिम 50% के 2% घोल (2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी) में 5 से 10 मिनट तक अच्छी तरह डुबोने के बाद ही बुवाई की विधिक प्रक्रिया पूरी करें।
खड़ी फसल में उपचार: रोग के लक्षण दिखने पर तत्काल एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% + डाई फेनोकोनाजोल 11.4% S.C. की 1 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से गाढ़ा घोल बनाकर प्रभावित एरिए में सघन छिड़काव सुनिश्चित करें।
दवाओं की सटीक मात्रा व पानी का अनुपात ही दिलाएगा कीटों से विधिक मुक्ति

"किसान भाइयों से विशेष अपील है कि वे बताई गई रासायनिक दवाओं को खरीदते समय उनकी निर्माण तिथि और प्रामाणिकता अवश्य जांच लें। छिड़काव हमेशा दोपहर के बाद (शाम के समय) शांत मौसम में करें, जब हवा की गति धीमी हो। जैविक और रासायनिक विधियों के इस समेकित तालमेल से न सिर्फ लागत घटेगी बल्कि आपकी फसलों का पूर्ण विधिक संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।"

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने सभी जिला कृषि अधिकारियों और राजकीय कृषि बीज भंडारों के प्रभारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखें। किसानों को किसी भी तकनीकी असुविधा या कीटों की गंभीर पहचान हेतु अपने क्षेत्रीय विकास खंड के कृषि रक्षा इकाई प्रभारी अथवा किसान कॉल सेंटर के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर पर तुरंत संपर्क स्थापित करना चाहिए।

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🌾 उन्नत तकनीक, समृद्ध किसान — वैज्ञानिक कीट प्रबंधन अपनाएं, अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित व खुशहाल बनाएं।

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