शाहजहाँपुर जनपद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में गन्ने और आम की बागवानी को सामयिक रोगों से सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विशेष मुहिम शुरू की गई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी श्री संजय कुमार द्वारा कृषक हित में फसलों में लगने वाले पायरिला व चोटी बेधक (टॉप बोरर) कीटों से विधिक बचाव हेतु महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव एवं संस्तुतियां जारी की गई हैं। इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा किसानों की फसलों की डिजिटल निगरानी हेतु शुरू की गई अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली के बारे में भी विस्तार से दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए हैं।
🪵 1. गन्ने की फसल (पायरिला एवं टॉप बोरर कीट से सुरक्षा चार्ट):| लक्षित कीट | 🐛 जैविक नियंत्रण (Organic) | 🧪 रासायनिक उपचार (Chemical) |
|---|---|---|
| पायरिला (Pyrilla) |
• इसके प्राकृतिक शत्रु एपीरेकेनिया मेलोनोल्युका का फसल वातावरण में संरक्षण करें, जिससे स्वतः रोकथाम होगी। • ट्राईकोग्रामा के 50,000 अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से 10-15 दिन के अंतराल पर प्रयोग करें। |
• क्लोरपायरीफोस 20% E.C. की 1.5 लीटर मात्रा अथवा • एसीफेट 50% + इमिडाक्लोप्रिड 01.80% S.P. की 1 लीटर मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें। |
| टॉप बोरर (चोटी बेधक) |
• ट्राईकोग्रामा किलोनिस के 50,000 से 60,000 अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से कुल 3 बार प्रयोग करें। • टी.एस.बी. ल्यूर (TSB Lure) 6 से 8 प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में स्थापित करें। |
• क्लोरपाइरीफास 20% E.C. की 1.5 लीटर मात्रा अथवा • क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5% S.C. की 375 मिली मात्रा को 600-800 लीटर पानी में घोलकर सघन छिड़काव करें। |
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नवीनतम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों का समावेश करते हुए देश में प्रौद्योगिकी आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि यह प्रणाली किसानों की खेती का सुरक्षा कवच बनेगी:
"मौसम में आ रहे बदलावों के बीच केवल दवाओं के अंधाधुंध छिड़काव से फसलें नहीं बचेंगी। किसानों को मित्र परजीवियों (जैविक शत्रुओं) का संरक्षण करना सीखना होगा। भारत सरकार का NPSS पोर्टल और ऐप शाहजहाँपुर के किसानों के लिए वरदान साबित होने जा रहा है। हमारे क्षेत्रीय तकनीकी कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों को डिजिटल पंजीकरण और एआई तकनीक से रूबरू करा रहे हैं।"
शाहजहाँपुर के राजकीय कृषि बीज एवं रक्षा केंद्रों पर इन सभी अनुमोदित दवाओं और लाइट ट्रैप्स की विधिक व पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करा दी गई है। जिला प्रशासन ने प्रबुद्ध किसानों से अपील की है कि वे कृषि रक्षा इकाई के तकनीकी विशेषज्ञों से सीधे संपर्क में रहें और किसी भी खेत में अज्ञात बीमारी या कीट का लक्षण दिखने पर तत्काल कृषि विभाग के ऐप अथवा कंट्रोल रूम को फोटो खींचकर प्रेषित करें, ताकि समय रहते फसल का विधिक और वैज्ञानिक उपचार किया जा सके।
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