लखनऊ। उत्तर प्रदेश को १ ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के विधिक संकल्प के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज प्रदेश की आर्थिक एवं डिजिटल प्रगति को रफ्तार देने वाले तीन अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस विधिक बैठक में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), ग्रामीण क्षेत्रों हेतु हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जुड़ी महत्वाकांक्षी पहल 'प्रोजेक्ट गंगा' तथा कृषि एवं किसानों की आय बढ़ाने के लिए गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने हेतु मंडी शुल्क एवं मंडी सेस में संभावित छूट की व्यापक समीक्षा की गई।
यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी) की प्रगति जांचते हुए मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह ऐतिहासिक परियोजना प्रदेश के एआई (AI) मिशन की बुनियादी विधिक संरचना तैयार करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि डाटा सेंटर्स का विस्तार केवल एनसीआर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा) क्षेत्र तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाए। इसके साथ ही, वैश्विक स्तर की बड़ी टेक कंपनियों से विधिक संवाद स्थापित कर राजधानी लखनऊ को 'एआई सिटी' (AI City) के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रहे कार्यों में युद्धस्तर पर तेजी लाने के निर्देश दिए।
| 📡 'प्रोजेक्ट गंगा' (ग्रामीण ब्रॉडबैंड क्रांति) | 🌾 इन-हाउस गेहूं प्रसंस्करण एवं मंडी सुधार |
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• ऑप्टिकल फाइबर का विस्तार: ग्रामीण अंचलों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का तेजी से विस्तार सुनिश्चित हो। • डिजिटल उद्यमी प्रशिक्षण: चयनित होने वाले ग्रामीण युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में उच्चस्तरीय गुणवत्तापूर्ण विधिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। • प्रोत्साहन (Incentive): डिजिटल उद्यमियों को कार्य की शुरुआत से ही उचित इंसेंटिव और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। |
• टैक्स व्यवस्था में सुधार: प्रदेश के भीतर ही गेहूं के प्रसंस्करण (Processing) को बढ़ावा देने के लिए मंडी टैक्स और मंडी शुल्क व्यवस्था को सुगम बनाया जाए। • मंडी शुल्क में संभावित छूट: इन-हाउस प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहित करने हेतु मंडी शुल्क व मंडी सेस में बड़ी विधिक छूट देने की रणनीति पर विमर्श। • आधुनिक मंडियां: उत्तर प्रदेश की सभी कृषि मंडियों को सर्वसुविधायुक्त, आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक स्वरूप दिया जाए। |
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने 'प्रोजेक्ट गंगा' और 'यूपीडीसीसी' दोनों ही परियोजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता बरतने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में समयबद्धता के साथ-साथ विधिक नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचने से न सिर्फ पंचायतों का कामकाज ऑनलाइन और डिजिटल होगा, बल्कि युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और विधिक स्वरोजगार की असीम संभावनाएं जन्म लेंगी।
"उत्तर प्रदेश अब केवल पारंपरिक व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आज यह देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का नया हब बनकर उभर रहा है। 'यूपीडीसीसी' और 'प्रोजेक्ट गंगा' हमारे ग्रामीण और शहरी समाज के मध्य के डिजिटल डिवाइड को हमेशा के लिए समाप्त कर देंगे। इसके साथ ही, किसानों के आर्थिक उन्नयन के लिए हमें गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को नई ऊंचाइयों पर ले जाना होगा। मंडियों का आधुनिकीकरण और शुल्क व्यवस्था में विधिक सुधार इसी दिशा में उठाए गए हमारे दूरदर्शी कदम हैं।"
इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद शासन स्तर पर संबंधित विभागों को विधिक ड्राफ्ट और शासनादेश की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। मंडी शुल्क और मंडी सेस में संभावित छूट मिलने से उत्तर प्रदेश में नए एग्रो-प्रोसेसिंग उद्योगों (आटा, सूजी, मैदा, बिस्कुट इकाइयां) के निवेश में भारी उछाल आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, लखनऊ को 'एआई सिटी' के रूप में स्थापित करने की विधिक घोषणा से वैश्विक आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश पहली पसंद बनकर उभरेगा।
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