स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर, 28 जुलाई। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर भारत सरकार एवं आयुष मंत्रालय की मंशा के अनुरूप आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार एवं जनस्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, शाहजहाँपुर के तत्वावधान में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी कार्यालय, मुख्य चिकित्सालय परिसर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष डॉ. विजय जोहरी ने की।
गोष्ठी में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, शाहजहाँपुर नगर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि आयुर्वेद का मूल उद्देश्य केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि उनके कारणों का निवारण और स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए जनजागरूकता सबसे प्रभावी उपाय है।
मुख्य वक्ता एवं संतन पाल सिंह आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, मिर्जापुर की सहायक प्राध्यापिका डॉ. पल्लवी सक्सेना ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार यकृत रंजक पित्त का प्रमुख स्थान है तथा यह रक्त धातु से घनिष्ठ रूप से जुड़ा महत्वपूर्ण अंग माना गया है। उन्होंने कहा कि पित्त दोष की विकृति, दूषित आहार-विहार एवं संक्रमण के कारण यकृत संबंधी विकार उत्पन्न हो सकते हैं।
चंद्रा नर्सिंग होम, रोजा की संचालक एवं आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सुमन अग्रवाल ने कहा कि पित्त की विकृति से कामला (पीलिया), पाण्डु तथा अन्य यकृत रोग विकसित हो सकते हैं। वहीं फ्यूचर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज, बरेली के सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकित गुप्ता ने बताया कि आयुर्वेद में निदान-परिवर्जन, पथ्य आहार, संतुलित दिनचर्या एवं उचित चिकित्सा के माध्यम से ऐसे रोगों की रोकथाम और प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, कटेली (जलालाबाद) की चिकित्साधिकारी डॉ. आंचल गुप्ता ने हेपेटाइटिस-बी के टीकाकरण, सुरक्षित रक्त, एकल-उपयोग वाली सिरिंज तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समय पर जांच कराने की अपील की। ददरौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. रचना रस्तोगी ने संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग एवं आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।
जिला अस्पताल के आयुष विभाग के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राजेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से हेपेटाइटिस की गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। वहीं मदनापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. सोफिया ने ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. हेमेंद्र वर्मा ने कहा कि आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार, स्वास्थ्य शिक्षा एवं जनजागरूकता के माध्यम से स्वस्थ एवं जागरूक समाज के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर डॉ. एस.पी. कौशल, डॉ. उत्तम रस्तोगी, डॉ. आर.पी. सक्सेना, डॉ. रजत सक्सेना, डॉ. विवेक त्रिपाठी, डॉ. सचिन वर्मा, डॉ. अतुल जोहरी, डॉ. मुजीब, डॉ. राजेन्द्र कुशवाहा सहित जनपद के अनेक आयुर्वेदिक चिकित्सक उपस्थित रहे।
गोष्ठी के अंत में चिकित्सकों ने आमजन से स्वच्छता अपनाने, सुरक्षित रक्त एवं इंजेक्शन के उपयोग, हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण कराने तथा किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल योग्य चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की। साथ ही आयुर्वेद के निवारक एवं वैज्ञानिक सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाकर स्वस्थ एवं रोगमुक्त समाज के निर्माण का संकल्प भी व्यक्त किया गया।
नोट: यह समाचार अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, शाहजहाँपुर द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।
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विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर आयुर्वेद चिकित्सकों ने यकृत स्वास्थ्य एवं जनजागरूकता पर किया मंथन
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