संवाददाता: सत्यपाल सिंह, लखनऊ
लखनऊ। मोहर्रम के अवसर पर राजधानी में उस समय एक भावुक और अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब हिंदू धर्मगुरु स्वामी सारंग ने 10वीं मोहर्रम के जुलूस में भाग लेते हुए छुरियों से मातम कर इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया। इस प्रतीकात्मक मातम के ज़रिए उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया।
स्वामी सारंग ने कहा—
"हुसैन की राह इंसानियत और बलिदान की राह है। उनका जीवन हर मज़हब के लोगों के लिए प्रेरणा है।"
उन्होंने आगे कहा कि—
"आज जब समाज में नफ़रत की दीवारें खड़ी हो रही हैं, तब इमाम हुसैन की शहादत हमें बताती है कि इंसानियत, प्रेम और सत्य के लिए बलिदान देना ही असली धर्म है।"
स्वामी जी के इस कदम को लेकर अनेक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनका सम्मान किया और कहा कि यह भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल है, जहां धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को महत्व दिया जाता है।
लखनऊ जैसे सांस्कृतिक शहर में इस प्रकार की पहल से न सिर्फ सामाजिक एकता को बल मिलता है बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सच्ची मानवता और मेल-जोल का उदाहरण पेश करता है।
स्वामी सारंग की यह भागीदारी दर्शाती है कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि तोड़ना।
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