✍️ ब्यूरो रिपोर्ट – सुधीर सिंह कुम्भाणी
सकरन (सीतापुर)। विकास खंड सकरन क्षेत्र के सोनावा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हुआ। कथा वाचन का अमृतपान कराने वाले कथाव्यास पंडित विवेक शुक्ला जी महाराज ने श्रद्धालुओं को गोकरण और धुंधकारी की कथा सुनाकर जीवन में सत्संग, भक्ति और वैराग्य के महत्व को बताया।
कथा के दौरान पंडित विवेक शुक्ला ने कहा कि –
“मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ा धर्म भगवान का भजन और भक्ति मार्ग का अनुसरण है। प्रभु के नाम का स्मरण ही मोक्ष का द्वार खोलता है।”
उन्होंने आत्मदेव, धुंधुली, गोकरण और धुंधकारी की कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए बताया कि कैसे पाप, मोह और भौतिक सुखों में फंसा मनुष्य दुखों का कारण स्वयं बनता है, जबकि सत्संग और भागवत श्रवण से मुक्ति संभव है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर भजन कीर्तन में भाग लिया।
कथा के सातवें दिन गोकरण-धुंधकारी प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
अंतिम दिन भागवत महापुराण की आरती के बाद भक्तों ने श्री हरिनाम संकीर्तन करते हुए एक दूसरे को प्रसाद वितरित किया।
इस अवसर पर गांव और आसपास के सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि के रूप में अनिल जायसवाल, ललित जायसवाल, बिमल जायसवाल, मनोज, अक्षत, आकाश, रमेश जायसवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन स्थानीय समिति द्वारा किया गया तथा समापन पर कथा व्यास पंडित विवेक शुक्ला का सम्मान कर आशीर्वाद लिया गया।
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