ब्यूरो रिपोर्ट: सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️
विकास खंड सकरन में कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कूड़ा घर निर्माण से लेकर कूड़ा ढोने वाले ई-रिक्शा की खरीद और संचालन तक बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, कई ग्राम पंचायतों में बिना चालक के कूड़ा वाहन दर्शाए जा रहे हैं, जबकि अधिकांश वाहन या तो निजी कार्यों में लगे हैं या लंबे समय से खड़े जंग खा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, बैटरी चालित ई-रिक्शा की खरीद में घटिया गुणवत्ता के वाहन ऊंचे दामों पर खरीदे गए। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा मनमाने बिल काटे गए और भुगतान में अनियमितताएं की गईं। संचालन स्तर पर भी फर्जी तरीके से चालकों का नामांकन कर मासिक भुगतान निकाले जाने के आरोप हैं, जबकि कूड़ा उठान और निस्तारण प्रभावी रूप से नहीं हो रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में गीला-सूखा कूड़ा नालियों और गलियों में जमा है, जबकि कूड़ा घरों तक कचरा नहीं पहुंच पा रहा। सकरन खुर्द और सांडा को छोड़ अधिकांश पंचायतों में व्यवस्था बदहाल बताई जा रही है। वहीं, कूड़ा प्रबंधन मद में खर्च की गई राशि के बावजूद स्वच्छता लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कूड़ा प्रबंधन से जुड़े मदों में लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को साफ-सफाई का लाभ नहीं मिल रहा। चर्चा है कि जिलाधिकारी के संभावित निरीक्षण को लेकर हलचल है, लेकिन जमीनी हालात में सुधार कब होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
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