ब्यूरो रिपोर्ट: सोम दत्त ✍️
लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र स्थित बुद्धेश्वर चौराहा इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है। यहां बीच सड़क पर लोग बेबस और लाचार खड़े नजर आते हैं, आंखों में बस मंज़िल की बेचैनी और कानों में लगातार बजते हॉर्न की आवाजें गूंजती रहती हैं।
सड़क को घेरकर खड़े ठेले, आधी सड़क पर सजी दुकानें और अनियंत्रित वाहनों की कतारों ने आम जनता की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। पब्लिक की भारी भीड़ में फंसकर लोगों की सांसें तक उखड़ने लगती हैं, लेकिन हालात सुधारने वाला कोई नजर नहीं आता।
चौराहे के बीचो-बीच ई-रिक्शा, टेम्पो और अनाधिकृत बसें बेतरतीब ढंग से खड़ी रहती हैं, जिससे हर समय लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहता है। सुबह से शाम तक यह चौराहा अराजक यातायात का केंद्र बना रहता है।
कहने को तो बुद्धेश्वर चौराहे पर प्रभारी की तैनाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में इंतजाम पूरी तरह नाकाम दिखाई देते हैं। ट्रैफिक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है।
शहर में ट्रैफिक सुधार के लिए प्रशासन का ‘हंटर’ चलने की बात कही जा रही है, लेकिन पारा के बुद्धेश्वर चौराहे पर यह हंटर पूरी तरह बेअसर नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस कब इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेती है और कब आम जनता को इस रोज़मर्रा की परेशानी से राहत मिलती है।
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