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कौशल क्रांति का विजन 2047: युवा शक्ति से विकसित उत्तर प्रदेश की ओर

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहांपुर, 28 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी बनकर उभर रही है। लगभग 25 करोड़ की जनसंख्या वाले इस राज्य में 62 प्रतिशत आबादी कार्यशील आयु वर्ग (15-59 वर्ष) में आती है, जो 2047 तक और बढ़ने का अनुमान है। यह जनसांख्यिकीय स्थिति प्रदेश के लिए एक सुनहरा अवसर प्रस्तुत करती है।

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस अवसर को पहचानते हुए कौशल विकास को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का केंद्र बनाया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से तैयार किया गया “विजन 2047” केवल एक योजना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव का व्यापक खाका है। इसका उद्देश्य है कि 2047 तक हर युवा कम से कम एक रोजगारपरक कौशल से सशक्त हो।

इस विजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीकों को शामिल करता है। जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा तकनीक, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल स्किल्स जैसे क्षेत्रों को प्रशिक्षण में शामिल किया जा रहा है, ताकि युवा केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि अवसर बनाने वाले बन सकें।

सरकार ने स्वरोजगार और उद्यमिता पर भी विशेष जोर दिया है। योजना के तहत 50 प्रतिशत से अधिक पाठ्यक्रम स्वरोजगार आधारित होंगे, जिससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरणा मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप माध्यमिक स्तर से ही कौशल शिक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

भौगोलिक पहुंच को आसान बनाने के लिए हर तहसील में एडवांस्ड स्किल ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की योजना है। इससे ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकेंगे। साथ ही 10 प्रतिशत युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य प्रदेश को वैश्विक मानव संसाधन केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम है।

पिछले वर्षों में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2017-18 के बाद से लगभग 13 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 5 लाख से अधिक को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया। विशेष रूप से कारागार बंदियों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और ग्रामीण युवाओं के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं।

डिजिटल पहलें भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हजारों युवाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण, करियर काउंसलिंग और आधुनिक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों में सुधार हुआ है।

सरकार ने इस विजन को लागू करने के लिए चरणबद्ध रोडमैप भी तैयार किया है, जिसमें शुरुआती चरण में प्रशिक्षण विस्तार और डिजिटल प्लेटफॉर्म, मध्य चरण में कौशल विश्वविद्यालय और वैश्विक प्रमाणन, तथा अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश को स्किल एक्सपोर्ट हब बनाने का लक्ष्य शामिल है।

यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अब अपनी जनसंख्या को चुनौती नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख रहा है। यदि यह योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो 2047 तक उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक कौशलयुक्त राज्य बन सकता है।


कौशल के साथ फिटनेस पर जोर: आईटीआई खेल प्रतियोगिता से उभरी नई कार्य संस्कृति

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

लखनऊ, 28 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इसका ताजा उदाहरण लखनऊ में आयोजित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता रही, जिसका समापन उत्साह और ऊर्जा के साथ हुआ।

यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा को सर्वांगीण विकास से जोड़ने की नई सोच का प्रतीक बनकर सामने आया। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि कौशल विकास के साथ-साथ युवाओं की शारीरिक फिटनेस, आत्मविश्वास और टीम भावना को भी मजबूत किया जाए।

इस प्रतियोगिता में जनपद और मंडल स्तर से चयनित लगभग 4000 प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया, जिनमें से करीब 600 प्रतिभागियों ने राज्य स्तर तक पहुंच बनाई। तीन दिवसीय इस आयोजन में छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी ने तकनीकी शिक्षा में बढ़ती जागरूकता और ऊर्जा को दर्शाया।

खेल गतिविधियों से संस्थानों में अनुशासन, प्रतिस्पर्धा और सकारात्मक माहौल विकसित होता है। इससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, धैर्य और टीमवर्क जैसे गुण विकसित होते हैं, जो उन्हें औद्योगिक कार्यसंस्कृति के अनुरूप ढालने में सहायक होते हैं।

विशेष रूप से छात्राओं की बढ़ती भागीदारी तकनीकी शिक्षा में लैंगिक संतुलन और सशक्तिकरण का संकेत है। सरकार द्वारा कौशल प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा और उद्योगों से साझेदारी के साथ अब खेल और व्यक्तित्व विकास को भी नीति में शामिल किया जा रहा है।

आने वाले समय में इस तरह के आयोजनों का विस्तार करने की योजना है, जिससे अधिक युवाओं को अवसर मिल सके और एक स्वस्थ, अनुशासित एवं आत्मविश्वासी तकनीकी कार्यबल तैयार किया जा सके।

उत्तर प्रदेश में कौशल और खेल का यह संगम एक ऐसे भविष्य की ओर संकेत करता है, जहां युवा केवल रोजगार के लिए तैयार नहीं होंगे, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलित और सक्षम भूमिका निभाएंगे। यही दृष्टिकोण विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव बनेगा।

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