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सफलता की कहानी: बरेली की ग्राम पंचायत भरतौल बनी स्वच्छता और आत्मनिर्भरता का मॉडल

स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

शाहजहांपुर, 06 फरवरी 2026। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जनपद बरेली की ग्राम पंचायत भरतौल ने सतत विकास, संसाधन सृजन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ऐसा स्वच्छता मॉडल स्थापित किया है, जो प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभरा है। पंचायत ने कचरा प्रबंधन और आय सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए स्वयं को आत्मनिर्भर पंचायत के रूप में स्थापित किया है।

भरतौल गांव में कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक स्वरूप देने के लिए वर्मी कम्पोस्ट केंद्र और रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से जैविक अपशिष्ट से खाद तैयार कर ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक पंचायत को वर्मी कम्पोस्ट बिक्री से ₹55,000 तथा डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण से ₹65,000 की आय प्राप्त हो चुकी है, जबकि पंचायत के बैंक खाते में ₹3,25,000 की राशि संचित है। इस धनराशि का उपयोग भविष्य के आयवर्धक विकास कार्यों में किया जा रहा है।

आय सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत द्वारा गेस्ट हाउस निर्माण भी कराया जा रहा है, जिससे बाहरी आगंतुकों को आवास सुविधा मिलने के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए नए रोजगार अवसर पैदा होंगे। उल्लेखनीय है कि यह ग्राम पंचायत कार्बन न्यूट्रल पुरस्कार के लिए भी पात्र हो चुकी है, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में इसकी उत्कृष्ट उपलब्धियों को दर्शाता है।

ग्राम पंचायत भरतौल की उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि सही दृष्टि, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ पंचायतें संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन कर विकास का मजबूत मॉडल बन सकती हैं। यह पंचायत अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों का उद्देश्य गांवों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है, और भरतौल जैसे मॉडल ग्राम इन प्रयासों की सफलता का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। पंचायत का स्वयं का राजस्व सृजन मॉडल प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहा है।

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