लखनऊ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को प्रदेश में मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने गन्ने के साथ तिलहनी और दलहनी फसलों की अंतःखेती को प्रोत्साहित करने की योजना पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उड़द और मूंग जैसी फसलों की अंतःफसल अपनाने से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और स्थिर आय प्राप्त होगी। इससे अन्नदाता की आय में बहुगुणित वृद्धि संभव हो सकेगी और कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।
बैठक में प्रदेश के लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन एवं दलहन फसलों को जोड़कर उत्पादन बढ़ाने तथा कृषि आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर बल दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रबी मौसम में सरसों व मसूर तथा जायद में उड़द व मूंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अंतःफसली मॉडल गन्ने की मुख्य फसल की उत्पादकता को प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल चयन, वर्षवार रोडमैप, तथा सहायता एवं अनुदान का स्पष्ट ढांचा तैयार करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह पहल प्रदेश की कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और बहु-आयामी बनाएगी तथा राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था और सकल मूल्य वर्धन (GVA) में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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