लखनऊ, 09 फरवरी 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ में आयोजित राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित सभी विकास एवं निर्माण कार्य वैज्ञानिक मानकों, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव तथा विधिक प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुपालन के साथ ही किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास की प्रत्येक प्रक्रिया में वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवागमन और आवासीय निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े सभी विकास प्रस्ताव संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ तैयार किए जाएं। प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय संबंधित विभागों को पर्यावरणीय जोखिम, जैव-विविधता पर संभावित प्रभाव, वन्यजीवों की आवाजाही, वैकल्पिक मार्गों तथा आधुनिक तकनीकी समाधानों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित एवं टिकाऊ दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में मुख्यमंत्री ने वृक्ष कटाई से संबंधित प्रस्तावों पर विशेषज्ञों की राय लेने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक वृक्ष कटान की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वृक्षों की कटाई केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही हो और विकास की आड़ में पर्यावरण को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। जहां विकल्प उपलब्ध हों, वहां ट्रेंचलेस तकनीक, एलिवेटेड स्ट्रक्चर तथा अन्य इको-फ्रेंडली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की नीति पर सरकार दृढ़ता से कार्य कर रही है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध प्राकृतिक विरासत सुनिश्चित की जा सके।
शाहजहॉपुर
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