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होली की छुट्टियों में हरियाली पर चला आरा, 72 घंटे में सैकड़ों प्रतिबंधित पेड़ काटे गए

 

सुधीर सिंह कुम्भाणी सीतापुर ✍️

सीतापुर। Sitapur जिले के Sakran क्षेत्र में होली की छुट्टियों के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान का मामला सामने आया है। आरोप है कि महज 72 घंटे में सैकड़ों प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों को काट दिया गया, जिससे क्षेत्र की हरियाली को भारी नुकसान पहुंचा है। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कई गांवों में चला पेड़ों पर आरा

जानकारी के अनुसार सेमराकला, देवतापुर, मोहारी, महतीन पुरवा, बेलवा, बेलवा बसहिया, मोहलिया, उमरा खुर्द, उमरा कला, शाहपुर लहसड़ा और सोहरिया गांवों में बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान किया गया। इस दौरान नीम, शीशम, जामुन, गूलर, बिलोर और जंगल जलेबी जैसी प्रतिबंधित प्रजातियों के सैकड़ों पेड़ों को काट दिया गया।

ग्रामीणों के अनुसार मोहारी गांव के नाले के भीतर स्थित सरकारी जमीन पर लगे बिलोर, जामुन, गूलर और जंगल जलेबी के पेड़ों को भी नहीं बख्शा गया। वहीं मोहलिया गांव में जैती, जामुन और शीशम के पेड़ काट दिए गए, जबकि बेलवा और सेमरा कला में नीम और देसी आम के पेड़ों को भी गिरा दिया गया।

परमिट की आड़ में कटे दर्जनों पेड़

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ पेड़ों के परमिट की आड़ में दर्जनों हरे-भरे पेड़ों का सफाया कर दिया गया। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में इतने पेड़ों के कटान की अनुमति दी गई थी या फिर बिना अनुमति कटान के बाद केवल औपचारिक जुर्माना लगाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।

वन विभाग पर उठे सवाल

घटना को लेकर जब वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से जानकारी ली गई तो उनका जवाब था कि “हम छुट्टी पर थे।” इस बयान के बाद विभाग की कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ गई है।

पौधारोपण भी हुआ बेकार

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत लगाए गए हजारों पौधों की देखरेख नहीं हुई, जिसके कारण कई पौधे बकरियों का चारा बन गए। इससे पर्यावरण संरक्षण के सरकारी प्रयासों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों में नाराजगी

तीन दिन की छुट्टियों के दौरान जिस तरह से क्षेत्र में हरियाली का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ, उससे लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में गांजर क्षेत्र पूरी तरह हरियाली विहीन हो सकता है

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और वन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और दोषियों पर कब तक सख्त कदम उठाए जाते हैं।

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