ब्यूरो रिपोर्ट: सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️
सकरन (सीतापुर): होली के पर्व से पहले मिलावटखोरों और अवैध वृक्ष कटान करने वालों की सक्रियता ने क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। जहां खाद्य विभाग ने आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए प्रयास तेज किए हैं, वहीं क्षेत्र के मिलावटखोर अपनी गतिविधियों में कोई बदलाव नहीं ला रहे। इसके साथ ही प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों का कटान प्रशासन की अवहेलना को उजागर कर रहा है।
क्षेत्र के कस्बा सांडा, सकरन, हरैया, कोंसर, ओड़ाझार, महराजनगर और गोडियनपुरवा चौराहे पर मिलावटी खोया, पनीर जैसी वस्तुएं खुलेआम बिकती मिलीं। वहीं महतीनपुरवा, देवता पुर, सेमराकला, सिकरहना और बेलवा में अवैध वृक्ष कटान की घटनाओं ने वन विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निरीक्षण अभियान का नेतृत्व कर रहे मुख्य खाद्य अधिकारी और रेंजर की मौजूदगी के बावजूद कार्रवाई सुस्त दिखाई दी। अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि त्योहारों के दौरान खोया और दूध से बने उत्पादों की बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाकर कुछ लोग जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी:
"मिलावटखोरी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और FIR जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
वन विभाग के डिप्टी रेंजर एस. शैलेश ने कहा कि प्रतिबंधित पेड़ कटान पूर्णतया वर्जित है और केवल राजस्व अनुमति मिलने पर ही कटान किया जा सकता है। मोहलिया और सोहरिया क्षेत्रों में हुए अवैध कटानों ने विभाग की छवि को प्रभावित किया है। उन्होंने साफ किया कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि प्रमाणित और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत विभाग को दें। गुड़ भट्ठियों से मिले दोषपूर्ण गुड़ पर भी कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य विभाग और वन रेंज बिसवां ने संकेत दिए हैं कि यह निगरानी अभियान होली तक लगातार जारी रहेगा ताकि नागरिक सुरक्षित रहकर त्योहार मना सकें और मिलावटखोरों तथा अवैध पेड़ कटान करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके। डिप्टी रेंजर के मार्गदर्शन में माली, वन रक्षक और वन दरोगा लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं।
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