बलरामपुर: अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए 'सतर्कता दिवस'; प्रशासन और संस्थान ने लिया जिला बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प

[ सामाजिक जागरूकता / बलरामपुर ]

ब्यूरो चीफ: प्रमोद मिश्रा, बलरामपुर ✍️

बलरामपुर | 19 अप्रैल, 2026 सच की आवाज वेब न्यूज - विशेष रिपोर्ट

लरामपुर जनपद में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए समर्पित 'भारतीय जन कल्याण सेवा संस्थान' ने अक्षय तृतीया के अवसर पर जिला प्रशासन के साथ मिलकर **'सतर्कता दिवस'** मनाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त की आड़ में होने वाले बाल विवाहों को रोकना और समाज को इस अपराध के प्रति जागरूक करना है।

कानूनी चेतावनी: बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006

बाल विवाह में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना एक गंभीर अपराध है, जिसमें दो साल की सजा और भारी जुर्माना का प्रावधान है। इसमें दोषी माने जाएंगे:

  • वर-वधू पक्ष के परिजन और बाराती।
  • विवाह संपन्न कराने वाले पंडित या मौलवी।
  • मैरिज हॉल मालिक, कैटरर, हलवाई और बैंड-बाजा वाले।

लक्ष्य 2030 - बाल विवाह मुक्त जिला: संस्थान के निदेशक देवतादीन पाण्डेय ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सघन जागरूकता अभियानों के कारण अब लोग जागरूक हो रहे हैं। प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों और धर्मगुरुओं के सहयोग से अब लोग स्वयं आगे आकर बाल विवाह की सूचना दे रहे हैं। हमारा लक्ष्य 2030 से पहले ही बलरामपुर को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाना है।

नेटवर्क की ताकत:
बता दें कि भारतीय जन कल्याण सेवा संस्थान, देश के सबसे बड़े नेटवर्क **'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन'** का सहयोगी संगठन है। यह नेटवर्क देश के 450 जिलों में सक्रिय है और अब तक 5 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाने में सफल रहा है।

अभियान के दौरान स्कूलों, पंचायतों और गांवों में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए गए। बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) और आशा यूनिटों ने भी इस पुनीत कार्य में अपना सक्रिय सहयोग दिया। संगठन संवेदनशील मौकों पर विशेष निगरानी रखकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

"बच्चों का बचपन बचाएं, बाल विवाह को जड़ से मिटाएं - सच की आवाज वेब न्यूज"

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