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लखनऊ: आशियाना में दिनदहाड़े कार लूट की सनसनीखेज वारदात, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

 

ब्यूरो रिपोर्ट: आशीष कुमार, लखनऊ

लखनऊ: राजधानी के आशियाना थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े गाड़ी छीनने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पीड़ित ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है।

रिकवरी के नाम पर सरेराह 'गुंडागर्दी'

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेलीबाग के कुबेर बागिया निवासी संजय कुमार आज 4 अप्रैल 2026 को अपनी वैगनआर कार (UP32 JN 9837) से आशियाना के पकरी पुल के पास से गुजर रहे थे। तभी अचानक 4 से 6 अज्ञात लोगों ने उनकी गाड़ी को बीच सड़क पर रोक लिया। खुद को रिकवरी एजेंट बताते हुए आरोपियों ने किश्त बकाया होने की बात कही और अभद्रता शुरू कर दी।

जबरन छीनी कार, पर्स और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब

पीड़ित संजय कुमार का आरोप है कि आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की कोशिश की और उन्हें जबरन गाड़ी से उतार दिया। आरोपी कार को छीनकर आशियाना स्थित अन्नपूर्णा कॉम्प्लेक्स ले गए। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि गाड़ी के साथ पीड़ित का पर्स भी आरोपियों के कब्जे में चला गया है, जिसमें निम्नलिखित सामान मौजूद था:

  • करीब ₹5000 नकद
  • महत्वपूर्ण दस्तावेज: आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, प्रेस पहचान पत्र और वोटर आईडी।
  • बैंक कार्ड: बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक के दो एटीएम कार्ड।

दबाव बनाकर हस्ताक्षर और ओटीपी मांगने का आरोप

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित पर अवैध रूप से कागजों पर हस्ताक्षर करने और मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) साझा करने का दबाव भी बनाया। पीड़ित का कहना है कि उनकी मात्र दो महीने की किश्त लंबित थी और बैंक की ओर से उन्हें कोई पूर्व नोटिस या सूचना भी नहीं दी गई थी, ऐसे में सरेराह गाड़ी छीनना पूरी तरह अवैध है।

पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल

घनी आबादी वाले आशियाना क्षेत्र में दिनदहाड़े हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों में डर पैदा कर दिया है। घटना के घंटों बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस पुलिसिया कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस इसी तरह मूकदर्शक बनी रही, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है।

न्याय की उम्मीद

पीड़ित ने थाना आशियाना में तहरीर देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपनी संपत्ति वापस दिलाने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस इस 'रिकवरी माफिया' पर नकेल कसती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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