[ मानवता की मिसाल / रक्त सेवा ]
स्टेट ब्यूरो हेड: योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर की चर्चित समाजसेवी संस्था 'सहयोग' के कोषाध्यक्ष महेंद्र दुबे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सेवा का कोई धर्म और समय नहीं होता। ग्राम पंचायत वशूलिया निवासी महेंद्र दुबे को जैसे ही खबर मिली कि जिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला को AB Negative ब्लड की सख्त जरूरत है, वे बिना वक्त गंवाए अस्पताल पहुंच गए।
हैरानी की बात यह है कि महेंद्र दुबे ने महज दो महीने पहले ही रक्तदान किया था, लेकिन महिला की गंभीर स्थिति और उसके अजन्मे बच्चे की जान बचाने की खातिर उन्होंने नियमों की परवाह न करते हुए खुद ही रक्त देने की ठान ली। उनके इस निस्वार्थ दान की बदौलत महिला और नवजात बच्चा, दोनों अब पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
बेटे को भी बनाया सेवा का राही: महेंद्र दुबे के सेवा भाव का किस्सा पुराना है। एक बार जब उन्होंने 15 दिन पहले ही रक्तदान किया था और दोबारा जरूरत पड़ी, तो उन्होंने अपने बेटे से रक्तदान कराकर मरीज की जान बचाई थी। उनके लिए मरीज का नाम या पता मायने नहीं रखता, केवल मानवता की पुकार मायने रखती है।
संस्था के संस्थापक अनिल गुप्ता (प्रधान) और शाहनवाज खां (एडवोकेट) ने कहा कि आज की दुनिया में महेंद्र दुबे जैसे लोग मिलना दुर्लभ है। उन्होंने पूरी टीम को महेंद्र दुबे जैसे समर्पित साथी पर गर्व होने की बात कही।
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