शाहजहाँपुर। हमारी प्राचीन समृद्ध ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक धरोहरों एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रख भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने हेतु प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। जिलाधिकारी **धर्मेंद्र प्रताप सिंह** ने अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देशव्यापी **'ज्ञान भारतम् मिशन' (Gyan Bharatam Mission)** का शंखनाद किया गया है। इस महा-अभियान के अंतर्गत प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्रों, दुर्लभ ग्रंथों और ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण एवं उनके सुरक्षित रख-रखाव हेतु सरकारी व निजी संग्रह केंद्रों तथा व्यक्तिगत संग्रहकर्ताओं के चिन्हीकरण व सुदृढ़ीकरण की कमान प्रक्रिया को प्रभावी कर दिया गया है।
आधिकारिक प्रशासनिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस अभियान को शाहजहाँपुर जनपद में समयबद्ध और पूरी तरह सफल बनाने हेतु कमान निर्देश जारी किए गए हैं। यदि जिले के किसी भी राजकीय या निजी कार्यालय, विद्यालय, महाविद्यालय, धार्मिक/अकादमिक संस्थान अथवा किसी व्यक्ति के पास व्यक्तिगत रूप से कोई प्राचीन पाण्डुलिपि, ताड़पत्र या दुर्लभ ग्रंथ संरक्षित हैं, तो वे तत्काल **जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) शाहजहाँपुर** के नोडल पटल से संपर्क स्थापित कर सकते हैं, ताकि हमारी ऐतिहासिक विरासतों को वैश्विक पटल पर सहेजा जा सके।
| 📊 चिन्हीकरण, डिजिटलीकरण एवं संस्थागत कमान लक्ष्य | 🚨 स्वामित्व सुरक्षा, विलेखीय गारंटी एवं संरक्षण नीति |
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• विस्तृत चिन्हीकरण: सरकारी-निजी पुस्तकालयों, प्राचीन धरोहरों, व्यक्तिगत संग्रहालयों का स्थलीय सर्विलांस व मैपिंग। • आधुनिक डिजिटलीकरण: पाण्डुलिपियों और प्राचीन ताड़पत्रों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर इंटरनेट विन्यास पर सुरक्षित करना। |
• स्वामित्व की पूर्ण गारंटी: चिन्हीकरण व सर्विलांस के उपरांत भी दुर्लभ ग्रंथों का विधिक स्वामित्व संबंधित संस्था या व्यक्ति का ही रहेगा। • सरकारी कमान सुरक्षा: इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को दीमक, नमी व समय की मार से बचाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों से संरक्षण प्रदान करना। |
जिला प्रशासन के अनुसार, कई बार जानकारी के अभाव में घरों या प्राचीन संस्थानों में रखे अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ, वेद-पुराणों की हस्तलिखित प्रतियां और ऐतिहासिक विलेख देख-रेख की विसंगति के कारण नष्ट हो जाते हैं। 'ज्ञान भारतम् मिशन' देश की इसी बौद्धिक संपदा को समूल नष्ट होने से बचाने का एक अभेद्य बीज है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को इस पूरे अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए मुख्य नोडल केंद्र बनाया गया है, जहाँ प्रत्येक प्राप्त सूचना का विलेखीय पंजीकरण किया जाएगा।
"संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश शासन की यह पहल हमारी गौरवशाली धरोहरों को अमर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। शाहजहाँपुर जनपद के सभी नागरिकों, प्रबुद्ध शिक्षाविदों और धार्मिक/सामाजिक ट्रस्टों से मेरी विनम्र अपील है कि वे आगे आएं और अपने पास उपलब्ध दुर्लभ ग्रंथों की जानकारी प्रशासन के साथ साझा करें। किसी को भी अपनी संपत्ति खोने का भय नहीं होना चाहिए, क्योंकि स्वामित्व पूरी तरह आपका ही रहेगा, सरकार केवल तकनीकी और वित्तीय स्तर पर उनके वैज्ञानिक संरक्षण व डिजिटलीकरण की जिम्मेदारी उठाएगी।" — जिलाधिकारी शाहजहाँपुर, श्री धर्मेन्द्र प्रताप सिंह
शाहजहाँपुर जिला कमान पटल, शिक्षा विभाग विंग, स्थानीय इतिहासकार परिषदों, कलेक्ट्रेट कचहरी प्रभाग, तहसील जनसुनवाई मंचों और जनपद के समस्त सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, सम्मानित अधिवक्ताओं तथा शिक्षाविदों ने जिलाधिकारी महोदय द्वारा स्वयं कमान संभालकर प्राचीन धरोहरों के संरक्षण हेतु किए गए इस सुशासनात्मक आह्वान की खुले दिल से सराहना की है। जिला सर्विलांस सेल ने पुनः समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया की किसी भी भ्रामक अफवाहों से दूर रहकर अपने उज्ज्वल भविष्य व सुशासित राष्ट्र के निर्माण में इस सांस्कृतिक महा-यज्ञ में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।
👥 मिशन क्रियान्वयन एवं नोडल सर्विलांस पटल समन्वय टीम का विवरण:"जनता के हक की आवाज, हर समय - सच की आवाज वेब न्यूज"
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लखनऊ
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