लखनऊ। उत्तर प्रदेश की तेजी से छलांग लगाती अर्थव्यवस्था, भारी औद्योगिक निवेश गतिविधियों और तीव्र शहरीकरण की कड़क आवश्यकताओं के अनुरूप अब स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कमान विन्यास को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली गई है। आज राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने विभाग के कार्यों की एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री जी ने दोटूक शब्दों में निर्देश दिया कि आमजन से सीधे जुड़े रजिस्ट्री कार्यालयों की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, पूर्णतः तकनीक आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केंद्रित बनाया जाए, ताकि भ्रष्ट आचरण और बिचौलिया संस्कृति का परमानेंट दमन किया जा सके।
विलेख के आधिकारिक सुशासन विवरण के अनुसार, मुख्यमंत्री जी ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आम नागरिकों के प्रत्यक्ष संपर्क वाले संवेदनशील स्थल हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं आधुनिक और पूरी तरह व्यवस्थित होनी चाहिए। उन्होंने कड़ा निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों (PSK) की तर्ज पर कलेक्टिव रूप से विकसित किया जाए, जिससे वहां आने वाले नागरिकों को सम्मानजनक और सुलभ वातावरण में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व वृद्धि के साथ-साथ सेवा की गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में परमानेंट शीर्ष पर है।
• 🛡️ अभेद्य सत्यापन कमान: संपत्ति एवं विवाह पंजीकरण में जालसाजी रोकने के लिए डिजिटल प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक एवं आईरिस (Iris) आधारित कस्टडी सत्यापन को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
• 🤖 हाई-टेक पेपरलेस प्रणाली: अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटाइजेशन करते हुए पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कार्यप्रणाली तथा संपत्तियों की जियो-टैगिंग व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
• 📊 मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था: संपत्तियों के मूल्यांकन में विसंगतियों को दूर करने के लिए एक यूनिफॉर्म और पारदर्शी मानकीकृत मूल्यांकन ढांचा विकसित किया जाएगा, जिससे बाजार आधारित मूल्य सुनिश्चित होगा और अदालती विवादों में परमानेंट कमी आएगी।
| 🎯 नागरिक केंद्रित डिजिटल कमान सुधार | 💼 कॉर्पोरेट विन्यास एवं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विलेख |
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• 🏢 कार्यालय विन्यास: पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर आधुनिकीकरण। • 🔍 जांच विन्यास: खतौनी आधारित ऑनलाइन डिजिटल जांच की कड़ाई। • 🔐 सत्यापन कस्टडी: बायोमेट्रिक, आईरिस व ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन। • 🗺️ जियो-टैगिंग विलेख: संपत्तियों का परमानेंट डिजिटल मैपिंग ट्रैकिंग। |
• 🏬 समीक्षा के मुख्य विषय: कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण एवं एलएलपी (LLP) करार। • 📉 विवाद दमन नीति: रेरा (RERA) के अंतर्गत विक्रय करारों की पारदर्शी कानूनी समीक्षा। • 🌍 सर्वोत्तम विधिक ढांचा: अन्य प्रगतिशील राज्यों की बेहतरीन व्यवस्थाओं का कलेक्टिव अध्ययन कर नया विधिक ब्लूप्रिंट तैयार करने का आदेश। |
"रजिस्ट्री दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार और बाबूगीरी पर लगाम लगाने के लिए उन्हें पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तरह कॉर्पोरेट और पारदर्शी लुक देना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का एक कड़क और बेहद साहसिक सुशासन विलेख है। संपत्ति पंजीकरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का समावेश और बायोमेट्रिक व आईरिस सत्यापन को अनिवार्य करना भू-माफियाओं और फर्जीवाड़ा करने वाले तत्वों की कमर परमानेंट तोड़ देगा। इसके साथ ही, कॉर्पोरेट विलय, एलएलपी और रेरा जैसे जटिल विषयों पर निवेश-अनुकूल विधिक ढांचे का निर्माण उत्तर प्रदेश को देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का कमान सिरमौर बनाएगा। 'सच की आवाज' इस अभूतपूर्व, पारदर्शी और आधुनिक राजस्व कमान नीति का कलेक्टिव स्वागत करती है।"
'सच की आवाज' वेब न्यूज के माध्यम से हमारे कमान कलेक्टिव स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव ने इस प्रशासनिक विलेख की कड़क पड़ताल करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के इन कड़े निर्देशों के बाद अब संपत्ति खरीद-फरोख्त में बाजार आधारित मानकीकृत मूल्यांकन लागू होने से जमीनी विवादों में भारी कलेक्टिव कमी आएगी और प्रदेश की जनता को परमानेंट राहत मिलेगी।
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शाहजहांपुर
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