Breaking News

साइबर गैंग का पर्दाफाश: UPI से लाखों रुपये उड़ाने वाले 3 शातिर गिरफ्तार, नेपाल के कैसीनो में करते थे रकम खर्च

 

ब्यूरो चीफ प्रमोद मिश्रा बलरामपुर ✍️

बलरामपुर। जनपद में सक्रिय साइबर अपराधियों के एक संगठित गिरोह का पुलिस ने सफल खुलासा करते हुए एक वयस्क अभियुक्त और दो बाल अपचारियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों की सिम कार्ड और आईफोन तकनीक का दुरुपयोग कर UPI खातों से लाखों रुपये निकालता था।

पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक एवं साइबर क्राइम नोडल अधिकारी विशाल पाण्डेय तथा क्षेत्राधिकारी उतरौला डॉ. जितेन्द्र कुमार के पर्यवेक्षण में चलाए गए विशेष अभियान "Cy-Vazra" के तहत यह कार्रवाई की गई।

मामला थाना कोतवाली उतरौला में दर्ज मुकदमा संख्या 098/2026 से संबंधित है। विवेचना के दौरान थाना कोतवाली उतरौला पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सनी चौरसिया एवं दो बाल अपचारियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

YouTube से सीखी साइबर ठगी की तकनीक

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी YouTube से आईफोन में UPI और वॉलेट लॉगिन की तकनीक सीखकर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। आरोपी पहले सेकेंड हैंड आईफोन खरीदते थे और परिचितों से फोटो खींचने या मोबाइल देखने के बहाने उनका फोन लेकर सिम कार्ड निकालकर अपने आईफोन में लगा देते थे।

इसके बाद पीड़ित के Paytm, NAVI UPI जैसे ऐप में लॉगिन कर नया पासकोड सेट कर देते थे। Apple Cloud के कारण लॉगिन आईफोन में सक्रिय रहता था, जबकि सिम वापस पीड़ित के मोबाइल में लगा दी जाती थी। इससे आरोपी बाद में भी पीड़ित के खाते का संचालन कर लेते थे।

नेपाल के कैसीनो में उड़ाए लाखों रुपये

पुलिस के अनुसार आरोपी नेपाल के चन्द्रौटा स्थित कैसीनो में जाकर पीड़ितों के खातों से UPI के माध्यम से भुगतान करते थे और बदले में नकद रकम प्राप्त कर लेते थे। धोखाधड़ी से मिली राशि का कुछ हिस्सा ऑनलाइन गेमिंग ऐप 'तिरंगा मोबाइल' में लगाया जाता था, जबकि बाकी रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर आपस में बांट ली जाती थी।

1.65 लाख रुपये की ठगी का खुलासा

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक पीड़ित अरुण वर्मा के खाते से 1.65 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। वहीं दूसरे पीड़ित के खाते से 95 हजार रुपये निकालकर नेपाल के कैसीनो में खर्च किए गए।

साक्ष्य मिटाने के लिए बेच देते थे आईफोन

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि घटना के बाद इस्तेमाल किए गए आईफोन स्थानीय मोबाइल दुकानों पर बेच दिए जाते थे, ताकि पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। बाद में दूसरा सेकेंड हैंड आईफोन खरीदकर इसी तरीके से दोबारा साइबर ठगी की जाती थी।

बलरामपुर पुलिस ने मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार अभियुक्तों को न्यायालय भेज दिया है। पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों और गिरोह से जुड़े नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

Post a Comment

0 Comments