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डिजिटल अरेस्ट?.. फरीदाबाद के बाद नोएडा मे महिला बनी शिकार ...

 

लेडी इंजीनियर को 8 घंटे तक बंधक बनाकर हड़पी 11 लाख से अधिक की नकदी 


उत्तर प्रदेश : नोएडा में एक नए तरह का साइबर फ्रॉड सामने आया है। Call करके एक महिला इंजिनियर को ठग ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और @CBI में तैनात एक #IPS अफसर और एक बंद हो चुकी एयरलाइंस के संस्थापक का नाम लिया। उसने महिला को कहा कि एयरलाइंस संस्थापक ने बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की है, जिसमें महिला ने भी साथ दिया है…उस फ्रॉड पुलिसकर्मी ने महिला को 'डिजिटली अरेस्ट' कर लिया और बचाने के नाम पर 11 लाख रुपये ठग लिए. महिला को जब इस धोखाधड़ी का अहसास हुआ तो उसने @uppolice को शिकायत दी।ऑनलाइन फ्रॉड केस नोएडा पुलिस के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

ऐसे दिया गया फ्रॉड को अंजाम...

@PTI_News के मुताबिक, महिला इंजिनियर

सीजा टीए ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उसे 13 नवंबर को एक कॉल आई, जिसमें #IVR (interactive voice response) के जरिये उससे कहा गया कि उसके आधार कार्ड से मुंबई में मोबाइल फोन सिम कार्ड खरीदा गया है.इस सिम का उपयोग महिलाओं का शोषण करने और अवैध विज्ञापनों में किया गया है. महिला ने बताया कि इसके बाद मेरा कॉल दूसरे आदमी को ट्रांसफर कर दिया गया, जिसने खुद को मुंबई पुलिस अफसर बताया. उसने फोन पर ही उससे प्राथमिक पूछताछ की. इसके बाद उसने महिला को स्काइप के जरिये वीडियो कॉल पर लिया. कथित अफसर ने महिला सीजा टीए से कहा कि उसके खिलाफ एक FIR रजिस्टर्ड की गई है और उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से वारंट जारी हुआ है. उसके स्काइप पर ही ये डॉक्यूमेंट महिला से शेयर भी कर दिये।

फिर कथित CBI अफसर से कराई बात...

महिला सीजा टीए के मुताबिक, इसके बाद मुंबई पुलिस के उस अफसर ने मुझे बेकसूर मानते हुए मुझे एक स्काइप ID दी और कहा कि अब आगे की पूछताछ ये CBI अफसर (मुंबई CBI में तैनात एक IPS अफसर का नाम लिया) करेंगे।कथित CBI अफसर ने उसे वीडियो कॉल पर एक एयरलाइंस फाउंडर का नाम लिया और कहा कि पुलिस को उसके घर से 246 डेबिट कार्ड मिले हैं, जिनमें से एक तुम्हारा भी है। उसने कहा कि इस अकाउंट से 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं, जिसके कमीशन के तौर पर एयरलाइन फाउंडर ने तुम्हे 20 लाख रुपये का कमीशन दिया है।

महिला इंजिनियर सीजा टीए के मुताबिक, इसके बाद उसने कहा कि "तुम्हारी बातों से तुम निर्दोष लग रही हो,आगे की जांच के लिए तुम्हें अपने सभी बैंक अकाउंट से सारे पैसे अपने #ICICI अकाउंट में ट्रांसफर करने होंगे और वहां से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ये पैसे एक #PFC अकाउंट में ट्रांसफर करने होंगे. महिला ने यह भी कहा कि इसे नेशनल सिक्योरिटी का मामला बताते हुए उस कथित अफसर ने इसका किसी से जिकर नहीं करने के लिए भी कहा. इस तरह से उसने मुझसे 11.11 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

सुबह से रात तक रखा 'डिजिटली अरेस्ट'... 

महिला सीजा टीए को जब अपने साथ हुए धोखे का अहसास हुआ तो उसने नोएडा साइबर पुलिस थाने को शिकायत दी, जिसमें उसने अपने साथ 11.11 लाख रुपये की ठगी करने और सुबह से रात तक 'डिजिटली अरेस्ट' रखने का आरोप लगाया. नोएडा सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की इंस्पेक्टर रीता यादव के मुताबिक, FIR दर्ज कर ली गई है और इस मामले में आगे जांच शुरू कर दी गई है।


फरीदाबाद में भी सामने आ चुका है ऐसा ही केस...


हाल ही में ऐसा ही एक केस हरियाणा के फरीदाबाद में भी सामने आ चुका है, जहां साइबर ठगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर एक महिला को 'डिजिटली अरेस्ट' किया. ठगों ने उसे भी इस बात पर सहमत कर लिया कि उसकी पर्सनल ID का उपयोग अवैध गतिविधियों में हुआ है. इसके बाद ठगों ने करीब एक सप्ताह तक उसे ऐसे ही कथित तौर पर 'गिरफ्तार' रखा. उसे हर समय स्काइप के जरिये ऑनलाइन बने रहने के लिए कहा गया ताकि उस पर कथित गिरफ्तारी के दौरान नजर रखी जा सके. साथ ही उसे कहा गया कि इसकी जानकारी किसी को नहीं होनी चाहिए।


क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?..


साइबर थाना प्रभारी रीता यादव ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट में मोबाइल या लैपटॉप पर वीडियो कॉलिंग कर या अन्य एप के जरिये व्यक्ति पर नजर रखी जाती है. उसे डरा धमका कर वीडियो कॉलिंग से दूर नहीं होने दिया जाता है. यानी वीडियो कॉल के जरिये व्यक्ति को जहां वह है वहीं कैद कर दिया जाता है. इस दौरान पीड़ित न तो किसी से बात कर सकता है और न कहीं जा सकता है. व्यक्ति को उनके मोबाइल फोन पर लगातार जुड़े रहने को मजबूर किया जाता है. ऐप पर लगातार चैटिंग, ऑडियो-वीडियो कॉल कर उसे ऐप से लॉग आउट नहीं होने दिया जाता है. डरा धमकाकर रुपये भी ऐंठे जाते हैं।

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