ब्यूरो रिपोर्ट: जहीन खान ✍️
लखनऊ के बक्शी का तालाब तहसील अंतर्गत सुल्तानपुर, बहादुरपुर और राजापुर गांवों के दलित और गरीब किसानों को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे भाजपा नेता और समाजसेवी तिरंगा महराज ने बड़ा बयान दिया है – "गरीबों की आवाज दबाने नहीं दी जाएगी, चाहे इसके लिए मुझे कितनी भी साजिशों का सामना क्यों न करना पड़े।"
तिरंगा महराज पिछले कई वर्षों से इन गांवों के किसानों के हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इटौंजा क्षेत्र स्थित नीलांश वाटर पार्क द्वारा गोमती नदी की धारा को अवैध रूप से मोड़कर दीवार बनाई गई है, जिससे आसपास के किसानों की खेती प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि चूंकि मामला दो तहसीलों से जुड़ा है, इसलिए कई बार प्रशासनिक जांच टीमें गठित की गईं, लेकिन हर बार निष्पक्ष जांच की बजाय शिकायतों को दबा दिया गया।
तिरंगा महराज ने आरोप लगाया कि गरीबों की आवाज उठाने की कीमत उन्हें खुद मुकदमों के रूप में चुकानी पड़ रही है। कई बार उन पर ही शांति भंग की धाराओं में केस दर्ज किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि रसूखदारों के इशारे पर झूठे किसान बनाकर फर्जी शपथ पत्र और बयान तैयार कर उन्हें फंसाने की साजिशें लगातार हो रही हैं।
इसके बावजूद, उन्होंने दो टूक कहा –
"सच्चाई के रास्ते में कितनी भी दीवारें खड़ी की जाएं, मैं पीछे हटने वाला नहीं। गरीब और दलित किसानों को उनका हक दिलाकर ही रहूंगा।"
उनका यह साहसी रुख इलाके में चर्चा का विषय बन गया है और आंदोलन अब नए मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है।
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