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ग्राम पंचायत नसीरपुर में अन्नपूर्णा भवन को लेकर उठा विवाद, ग्रामीणों ने स्थानांतरण व विकास कार्यों की जांच की मांग

 

ब्यूरो रिपोर्ट: पप्पू कुमार चौहान ✍️


सकरन (सीतापुर)।

विकास खंड सकरन की ग्राम पंचायत नसीरपुर में प्रस्तावित अन्नपूर्णा भवन को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामवासियों ने मानकों के विपरीत कार्य, ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की कथित मनमानी तथा सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए अन्नपूर्णा भवन को स्थानांतरित कर ग्राम अन्दुपुर में बनाए जाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्य प्राक्कलन और निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं कराए गए हैं। आरोप है कि प्रधान और सचिव ने अपने तरीके से कार्य कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया, जिससे पंचायत के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


मानक विहीन निर्माण और मनरेगा में गड़बड़ी के आरोप

ग्रामीणों ने पंचायत में निर्मित अंत्येष्टि स्थल, इंटरलॉकिंग सड़कें, सोकपिट, खंडजा सहित अन्य विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यों में भी भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।

ग्रामीणों के अनुसार,

  • मनरेगा मजदूरों की मजदूरी उनके खातों में न भेजकर अन्य खातों में ट्रांसफर की जा रही है।
  • मनरेगा मेट की आईडी से फर्जी फोटो अपलोड किए जा रहे हैं।
  • इन अनियमितताओं में मनरेगा मेट की संलिप्तता भी सामने आ रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि मानक विहीन अंत्येष्टि स्थल की जांच कर भुगतान तत्काल रोका जाए, ताकि सरकारी धन की और बर्बादी न हो।


ग्रामीणों की एकजुट मांग

इस विरोध में दिनेश सिंह, दिनेश कश्यप, विनोद कश्यप, नरेश राजपूत, विनोद राजपूत, सुरेश राजपूत, सीताराम, अनुभव, मुटरु, अनुज सिंह, विशेष सिंह, ओमपाल सिंह, राजपाल सिंह, धनराज, छोटेलाल, संदीप अवस्थी, संतोष कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हैं। सभी ने एक स्वर में अन्नपूर्णा भवन को अन्दुपुर में बनाए जाने और पंचायत में हुए विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।


अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

मामले को लेकर जब खंड विकास अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो तीन बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, जिससे ग्रामीणों में और आक्रोश देखने को मिला।
हालांकि एपीओ विकास श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी


अब निगाहें प्रशासन पर

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्चाधिकारियों से शिकायत करने और आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

यह मामला सिर्फ एक भवन के स्थान का नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत में पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकारी धन के सही उपयोग से जुड़ा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कब और क्या ठोस कदम उठाता है।

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