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शाहजहाँपुर के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा अभियान — फैमिली एडॉप्शन कार्यक्रम के तहत दो मेगा स्वास्थ्य शिविर सफलतापूर्वक आयोजित


 स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, शाहजहाँपुर द्वारा फैमिली एडॉप्शन कार्यक्रम के तहत ग्रामीण स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। दिनांक 07 एवं 14 नवंबर 2025 को सामुदायिक चिकित्सा विभाग की टीम ने ग्राम बरूआ और मुतिहाशा में दो बड़े स्वास्थ्य शिविरों का सफल आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

🌟 प्रमुख आकर्षण:
दोनों शिविरों में ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और दवा वितरण की सुविधाएँ प्रदान की गईं।
शिविरों में उपस्थित रहे महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश कुमार, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई ऊर्जा प्रदान की।

🩺 स्वास्थ्य परीक्षण में शामिल सेवाएँ:

  • ऊँचाई, वजन, कूल्हा, कमर मापन
  • रक्तचाप व हीमोग्लोबिन परीक्षण
  • मधुमेह जाँच
  • सामान्य रोग, स्त्री रोग, दंत रोग व नेत्र रोग का परीक्षण
  • 300 से अधिक मरीजों को निःशुल्क उपचार व दवा वितरण

🎤 अधिकारियों का संदेश:
सामुदायिक चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने कहा—
“परिवार गोद लेने का कार्यक्रम ग्रामीण स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सेवाएँ हर घर तक पहुँचे और लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों।”


🚩 ‘वन वर्ल्ड, वन हेल्थ’ रैली आकर्षण का केंद्र
दोनों ग्रामों में “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” थीम पर जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

👨‍⚕️ टीम का योगदान:
शिविर को सफल बनाने में प्रमुख रूप से सह-आचार्य डॉ. सुमित सक्सेना, डॉ. इला रावत, डॉ. दिव्यांश सिंह, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. बुशरा अहमद, डॉ. तपस्या राज, डॉ. दिव्या अरुण सहित कई विभागों—
स्त्री रोग, सामान्य चिकित्सा, नेत्र रोग और दंत रोग विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों व इंटर्न ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

माध्यमिक जूनियर विद्यालय के अध्यापकों ने भी पूरे आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

🏥 निष्कर्ष:
इन दोनों शिविरों की सफलता ने साबित कर दिया कि चिकित्सा महाविद्यालय का फैमिली एडॉप्शन कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
यह पहल न केवल घर-घर तक स्वास्थ्य पहुँचाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण समुदाय में स्वास्थ्य साक्षरता और जागरूकता भी बढ़ा रही है।

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