ब्यूरो रिपोर्ट ,सुधीर सिंह कुम्भाणी— सकरन (सीतापुर)
कस्बा सकरन में बिसवां मोड़ स्थित यज्ञशाला पर जारी सात दिवसीय श्री हनुमत महायज्ञ एवं वृहद रासलीला के तहत बुधवार की रात वृंदावन से आए कलाकारों ने राजा मोरध्वज की कथा का हृदयस्पर्शी मंचन किया। कथा का दिव्य रूपांतरण देख श्रोतागण भावविभोर हो उठे।
कलाकारों ने दृश्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैसे श्रीकृष्ण ने अर्जुन के सामने राजा मोरध्वज की दानवीरता और भक्ति की प्रशंसा की। इसे सिद्ध करने हेतु श्रीकृष्ण साधु के वेश में, तथा यमराज शेर के रूप में राजा मोरध्वज के दरबार पहुंचे।
शेर के भूखे होने की बात कहकर राजा से उनके पुत्र ताम्रध्वज को भोजन के रूप में मांगा गया। धर्म की रक्षा और दान की मर्यादा निभाते हुए राजा और रानी ने अपने पुत्र ताम्रध्वज को आरे से काटकर शेर के सामने समर्पित कर दिया। यह देखकर अर्जुन स्तब्ध होकर बेहोश हो गए।
तभी श्रीकृष्ण ने प्रकट होकर राजा मोरध्वज को आशीर्वाद दिया और ताम्रध्वज को पुनः जीवित कर दिया। मोरध्वज की अटूट भक्ति और त्याग देख अर्जुन चकित रह गए।
कार्यक्रम में यज्ञाध्यक्ष प्रकाशानंद सरस्वती (फलाहारी), प्रबंधक विमल मिश्र, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जायसवाल, सचिन यदुवंशी समेत भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।
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लखनऊ
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