स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻
लखनऊ, 12 दिसंबर 2025।
प्रदेश सरकार श्रमिकों और कामगारों के कल्याण के लिए व्यापक स्तर पर योजनाएं संचालित कर रही है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण (नियोजन तथा सेवाशर्त विनियमन) नियमावली लागू की गई है। साथ ही उ.प्र. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन भी किया गया है।
18 से 60 वर्ष तक के वे श्रमिक, जिन्होंने एक वर्ष में 90 दिनों से अधिक निर्माण कार्य किए हैं, इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण के पात्र हैं। सरकार ने 40 से अधिक कार्यों को निर्माण श्रेणी में शामिल किया है, जिनमें—
बेल्डिंग, बढ़ईगीरी, कुआँ खोदना, राजमिस्त्री कार्य, प्लम्बरिंग, सड़क निर्माण, इलेक्ट्रिक वर्क, पुताई, टाइल्स लगाने का कार्य, सुरंग निर्माण, मार्बल-स्टोन कार्य, चूना-गारा कार्य, तथा निर्माण स्थल पर सुरक्षा देने वाले चौकीदार का कार्य शामिल है।
इसके अलावा मशीनरी स्थापना, मॉड्यूलर किचन, भवनों की आंतरिक सज्जा, अग्निशमन प्रणाली, खनन कार्य, ईंट निर्माण, पार्क-फुटपाथ निर्माण, स्विमिंग पूल/गोल्फ कोर्स निर्माण जैसे कार्य भी इसी श्रेणी में आते हैं।
पंजीकरण प्रक्रिया
श्रमिक को पंजीकरण हेतु—
जहाँ 10 या उससे अधिक श्रमिक कार्य करते हैं, ऐसे सभी निर्माण स्थलों का पंजीकरण अनिवार्य है। ₹10 लाख से अधिक लागत वाले भवन भी इसके दायरे में आते हैं। निर्माण लागत का 1% उपकर के रूप में लिया जाता है, जिसका उपयोग श्रमिक कल्याण योजनाओं पर किया जाता है।
श्रमिकों के लिए प्रमुख कल्याणकारी योजनाएँ
प्रदेश सरकार पंजीकृत श्रमिकों को कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे रही है, जिनमें शामिल हैं—
इन योजनाओं के माध्यम से लाखों श्रमिकों और उनके परिवारों को करोड़ों रुपए की सहायता प्रतिवर्ष प्रदान की जा रही है।
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