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मनमानी धान खरीद से स्थानीय प्रशासन की उड़ी खिल्ली, अदवारी धान क्रय केंद्र पर करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप

 

ब्यूरो रिपोर्ट सुधीर सिंह कुम्भाणी

सकरन (सीतापुर)। क्षेत्र में धान खरीद को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत अदवारी में स्थित सी.एम.एस. बिसवां पुरैनी (PCF) धान क्रय केंद्र पर दस्तावेजों में हेरफेर कर करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि केंद्र पर स्थानीय किसानों को दरकिनार कर कागजी किसानों के नाम पर धान खरीद दिखाकर सरकारी धन की चपत लगाई गई है।

जानकारी के अनुसार, धान क्रय केंद्र पर 17 अक्टूबर 2025 से 23 दिसंबर 2025 तक 129 किसानों से 816.30 टन धान की खरीद दर्शाई गई है, जिसकी कुल राशि लगभग 2 करोड़ 5 लाख 76 हजार 457 रुपये बताई जा रही है। लेकिन जांच में सामने आया है कि कई किसानों के नाम-पते संदिग्ध हैं। कुछ प्रपत्रों में पते के स्थान पर केवल “सीतापुर, 78@” जैसे कोडवर्ड दर्ज किए गए हैं, जिससे वास्तविक सत्यापन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय किसानों का आरोप है कि केंद्र संचालक द्वारा व्यवसायियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह पूरा खेल रचा गया, जिसके चलते हजारों किसान अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हुए। अदवारी निवासी किसान गजराज ने बताया कि उन्होंने 17, 18 और 27 अक्टूबर को करीब 160 कुंतल धान लगभग 4 लाख रुपये में बेचा। इसी तरह सुपौली निवासी अरविंद समेत अन्य किसानों ने भी धान बिक्री की। वहीं, संतोष कुमार (80 कुंतल), राजेंद्र प्रसाद, अनूप कुमार, सुमन देवी, राजरानी, रामदेवी और रिंकी जैसे कई नाम ऐसे हैं, जिनकी सनद-सिनाख्त का कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।

आरोप है कि जिलाधिकारी की सख्ती के बावजूद अदवारी धान क्रय केंद्र पर बड़े पैमाने पर दस्तावेजी हेरफेर कर करोड़ों रुपये का खेल खेला गया। इस पूरे प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए भारतीय किसान यूनियन (जनमंच) के जिलाध्यक्ष रामशंकर सिंह ने एडीओ सहकारिता सकरन को मांग पत्र सौंपा है।

किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि धान क्रय केंद्रों पर बिक्री करने वाले किसानों का पुनः सत्यापन नहीं कराया गया और क्षेत्रीय किसानों का धान नहीं तौला गया, तो महराजनगर, पलौली, अरुवा और सांडा के केंद्र संचालकों के खिलाफ जिलाधिकारी से वार्ता के बाद पैदल मार्च किया जाएगा।

मामले ने प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और किसानों को न्याय कब तक मिलता है।

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