स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻
शाहजहांपुर: 03 दिसम्बर, 2025
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक प्रणाली सुशासन की रीढ़ मानी जाती है। न्याय व्यवस्था जितनी सक्षम, पारदर्शी और सशक्त होगी, समाज में उतना ही विश्वास, स्थिरता और सुशासन स्थापित होगा। इसी दृष्टि से प्रदेश सरकार न्यायिक प्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए कई नई पहलें लागू कर रही है।
प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों के लिए—
जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।
न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में—
का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि न्यायिक अधिकारियों, प्रॉसिक्यूटर्स, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षित किया जा सके।
आजादी के अमृतकाल के प्रथम वर्ष में तीन महत्वपूर्ण कानून लागू किए गए—
ये कानून देश में न्याय की धारणा को नई दिशा देते हैं। प्रदेश में इन कानूनों के सफल क्रियान्वयन हेतु तेजी से कार्य किया जा रहा है।
रूल ऑफ लॉ बेंच (न्यायाधीश) और बार (वकील) के बेहतर समन्वय से ही मजबूत बनता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने—
प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय देश के बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर वाले न्यायालयों में गिना जा रहा है।
महिलाओं और बच्चों के लिए न्याय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने हेतु—
राज्य स्तर पर स्थापित UP State Forensic Institute में युवाओं को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के तहत—
को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा रहा है। इससे जांच से लेकर न्याय तक की पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और जवाबदेह होगी।
प्रदेश सरकार की यह दूरदर्शी नीति न्यायालयों, अधिकारियों और आमजन — सभी को आधुनिक, सुगम और पारदर्शी न्याय प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई तकनीक, आधुनिक ढांचे और बेहतर समन्वय के साथ प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था अब और अधिक सुदृढ़ हो रही है।
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