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न्याय व्यवस्था को सुलभ, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता पत्र सूचना शाखा — सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

शाहजहांपुर: 03 दिसम्बर, 2025
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक प्रणाली सुशासन की रीढ़ मानी जाती है। न्याय व्यवस्था जितनी सक्षम, पारदर्शी और सशक्त होगी, समाज में उतना ही विश्वास, स्थिरता और सुशासन स्थापित होगा। इसी दृष्टि से प्रदेश सरकार न्यायिक प्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए कई नई पहलें लागू कर रही है।

डिजिटल और आधुनिक शिक्षा से सशक्त हो रही नई पीढ़ी

प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों के लिए—

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म,
  • ई-कोर्ट प्रणाली,
  • अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेज़ोल्यूशन (ADR),
  • साइबर लॉ

जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।

न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में—

  • आधुनिक हॉस्टल,
  • स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,
  • स्मार्ट क्लासरूम

का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि न्यायिक अधिकारियों, प्रॉसिक्यूटर्स, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षित किया जा सके।

अमृतकाल में लागू हुए तीन नए कानून

आजादी के अमृतकाल के प्रथम वर्ष में तीन महत्वपूर्ण कानून लागू किए गए—

  1. भारतीय न्याय संहिता-2023
  2. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023
  3. भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023

ये कानून देश में न्याय की धारणा को नई दिशा देते हैं। प्रदेश में इन कानूनों के सफल क्रियान्वयन हेतु तेजी से कार्य किया जा रहा है।

बेहतर समन्वय हेतु इन्टीग्रेटेड कोर्ट परिसर

रूल ऑफ लॉ बेंच (न्यायाधीश) और बार (वकील) के बेहतर समन्वय से ही मजबूत बनता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने—

  • 10 जनपदों में एक साथ इन्टीग्रेटेड कोर्ट परिसर स्वीकृत किए हैं।
  • जिले स्तर के सभी न्यायालयों, बार रूम, आवास और सुविधाओं को एक ही कैंपस में उपलब्ध कराया गया है।
  • जिला न्यायाधीशों के चेम्बर में ए.सी. लगाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
  • डिजिटल डिपोज़िशन राइटर की नियुक्ति भी स्वीकृत की गई है।

प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय देश के बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर वाले न्यायालयों में गिना जा रहा है।

महिला–बच्चों से जुड़े अपराधों में त्वरित न्याय

महिलाओं और बच्चों के लिए न्याय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने हेतु—

  • 380 से अधिक पॉक्सो और फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए हैं।
  • लोक अदालत, मध्यस्थता और आर्बिट्रेशन को बढ़ावा देकर विवादों के त्वरित समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
  • प्रदेश के सभी रेंज स्तर पर फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं संचालित हो चुकी हैं।

UP State Forensic Institute और ICJS से बढ़ी रफ्तार

राज्य स्तर पर स्थापित UP State Forensic Institute में युवाओं को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के तहत—

  • ई-कोर्ट
  • ई-पुलिसिंग
  • ई-प्रॉसीक्यूशन
  • ई-फॉरेंसिक
  • ई-प्रिजन

को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा रहा है। इससे जांच से लेकर न्याय तक की पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और जवाबदेह होगी।

निष्कर्ष

प्रदेश सरकार की यह दूरदर्शी नीति न्यायालयों, अधिकारियों और आमजन — सभी को आधुनिक, सुगम और पारदर्शी न्याय प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई तकनीक, आधुनिक ढांचे और बेहतर समन्वय के साथ प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था अब और अधिक सुदृढ़ हो रही है।



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