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उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को बड़ी सहायता: डेयरी इकाइयों की स्थापना व आधुनिकीकरण पर 5 करोड़ तक अनुदान

 


स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

शाहजहांपुर: 03 दिसम्बर, 2025

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को नई दिशा मिली है। कृषि के साथ पशुपालन सदियों पुरानी जीवनशैली का अंग रहा है और प्रदेश सरकार द्वारा मिल रही सुविधाओं का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज दुग्ध उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है।

प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता वर्ष 2021 के 321 ग्राम से बढ़कर 2024 में 471 ग्राम हो गई है, जो डेयरी क्षेत्र की प्रगति का स्पष्ट संकेत है। सरकार द्वारा नस्ल सुधार, बायोगैस प्लांट, पशुपालक प्रशिक्षण और डेयरी नीति के माध्यम से दुग्ध उत्पादन व डेयरी उद्योग को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।

UP दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति–2022 : 5 करोड़ तक अनुदान

उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति 2022 के अंतर्गत प्रदेश सरकार—
डेयरी उत्पाद इकाइयों की स्थापना और आधुनिकीकरण पर अधिकतम ₹5 करोड़ तक का पूंजीगत अनुदान उपलब्ध करा रही है।

किस-किस क्षेत्र में मिलेगा अनुदान?

1. डेयरी प्रसंस्करण एवं दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयाँ (नई/विस्तार)

  • प्लांट, मशीनरी, तकनीकी सिविल कार्य व स्पेयर पार्ट्स की लागत पर
    35% अनुदान — अधिकतम ₹5 करोड़

(नोट: विस्तार की स्थिति में कम से कम 25% क्षमता बढ़ाना अनिवार्य)


2. पशु आहार एवं पशु पोषण उत्पाद निर्माणशाला (नई इकाइयाँ)

  • मशीनरी व तकनीकी सिविल कार्य पर
    35% अनुदान — अधिकतम ₹5 करोड़

3. विद्यमान डेयरी प्लांट का आधुनिकीकरण / स्टार्ट-अप टेक्नोलॉजी

  • SCADA सिस्टम
  • न्यू जेनरेशन डेयरी मशीनरी
  • आधुनिक उपकरण

इन पर 35% अनुदान — अधिकतम ₹2.50 करोड़


4. फील्ड में ट्रेसेबिलिटी एवं क्वालिटी कंट्रोल उपकरण

जैसे—

  • डाटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन यूनिट (AMCU)
  • विलेज लेवल कलेक्शन सेंटर उपकरण

इन पर 35% अनुदान — अधिकतम ₹1 करोड़


5. कोल्ड चेन की स्थापना

  • रेफ्रीजररेटेड वैन/इंसुलेटेड वैन
  • रोड मिल्क टैंकर
  • बल्क मिल्क कूलर
  • आइसक्रीम ट्रॉली
  • चिलिंग प्लांट/कोल्ड रूम

इन पर 35% अनुदान — अधिकतम ₹1 करोड़


6. पशु आहार इकाइयों का विस्तारीकरण

(कम से कम 25% क्षमता वृद्धि आवश्यक)

  • 35% अनुदान — अधिकतम ₹2 करोड़

7. सूक्ष्म उद्यम (चीज, आइसक्रीम आदि)

  • मशीनरी पर 50% अनुदान — अधिकतम ₹50 लाख

तेजी से बढ़ रहा है निवेश

इस प्रोत्साहन नीति से प्रदेश में सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश डेयरी उद्योग में आकर्षित हो चुका है। इससे न केवल प्रदेश में डेयरी आधारित रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि किसानों और पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।



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