स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻
शाहजहांपुर : 03 दिसम्बर, 2025
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है, जो राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत योगदान करता है। इसके बावजूद प्रदेश में संगठित क्षेत्र में केवल 10 प्रतिशत दुग्ध ही प्रसंस्कृत किया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 17 प्रतिशत है।
दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता के इस अंतराल को कम करने तथा डेयरी क्षेत्र की विशाल संभावनाओं का दोहन करने हेतु प्रदेश में निवेश की अत्यधिक संभावनाएँ उपलब्ध हैं।
आज का उपभोक्ता संतुलित पोषण, गुणवत्ता और विविध उत्पादों की ओर तेजी से अग्रसर है। साथ ही, प्रदेश में कच्चे माल की उपलब्धता, नवीन प्रसंस्करण तकनीक और बढ़ती प्रयोज्य आय ने डेयरी सेक्टर को विस्तार देने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान किया है। इन्हीं संभावनाओं को वास्तविक रूप देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने दूरगामी एवं निर्णायक कदम उठाए हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति–2022 डेयरी क्षेत्र के सभी हितधारकों — दुग्ध उत्पादक, उद्यमी, प्रसंस्करण इकाइयाँ, FPO/ MPC आदि — के लिए अनुकूल अवसर प्रदान करती है।
इस नीति के माध्यम से—
नीति में निम्न क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए सहायता प्रदान की जाती है—
नए प्लांट लगाने वालों को विभिन्न स्तरों पर अनुदान एवं रियायतें प्रदान की जाएँगी।
मौजूदा इकाइयों में कम से कम 25% क्षमता विस्तार होने पर सहायता उपलब्ध।
जैसे—
चीज़, आइसक्रीम, कल्चर्ड प्रोडक्ट, दही, बटर, पनीर, फ्लेवर्ड मिल्क आदि बनाने वाली इकाइयों को विशेष सहायता।
सरकार निम्न उपकरण/इकाइयों के लिए सहायता प्रदान कर रही है—
इसके साथ ही— FPO, MPC, सहकारी समितियों एवं निजी डेयरी उद्यमियों को डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ करने हेतु सभी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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