ब्यूरो रिपोर्ट सुधीर सिंह कुम्भाणी
सकरन (सीतापुर)। ब्लॉक सकरन क्षेत्र की गौशालाओं में गौवंशों की बदहाल स्थिति और उनके नाम पर निकाली जा रही सरकारी धनराशि की जांच की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष सुशील राज सोमवार को ब्लॉक परिसर में आमरण अनशन पर बैठ गए। गौमाता की दुर्गति से आहत किसान नेता ने गौहत्या पर रोक, गौशालाओं में रह रहे पशुओं की वास्तविक स्थिति की जांच और सड़कों व किसानों के खेतों में घूम रहे आवारा गौवंशों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई है।
किसान नेता सुशील राज का कहना है कि ब्लॉक सकरन में स्थित सभी सरकारी गौशालाओं में बीते छह महीनों से गौवंशों के नाम पर भारी धनराशि निकाली जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौशालाओं में मौजूद गायों की संख्या, उनकी स्थिति, उनके द्वारा उत्पादित दूध, दही और घी से होने वाली आय तथा उस आय का लाभ किसे मिल रहा है, इसका कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं है।
अनशन के माध्यम से सुशील राज ने मांग की है कि सरकारी गौशालाओं से अर्जित समस्त आय, खर्च की गई पूरी धनराशि और वर्तमान में मौजूद सभी गौवंशों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक बघाढ़ाक गौशाला समेत सभी गौशालाओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
इस आंदोलन की जानकारी मिलते ही सोमवार शाम करीब 7:30 बजे महमूदाबाद से पत्रकार सुधीर सिंह चौहान, शाहपुर से पप्पू चौहान और अंदूपुर से सुधीर सिंह कुम्भाणी मौके पर पहुंचे और अनशन पर बैठे सुशील राज को कंबल भेंट किया। पत्रकारों ने उनकी मांगों को जायज बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं इस गंभीर मामले पर खंड विकास अधिकारी सकरन से कई बार फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इससे नाराजगी जाहिर करते हुए स्थानीय लोगों और किसान संगठनों ने कहा कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन की चुप्पी असहज करने वाली है।
अब यह देखने वाली बात होगी कि गौ-रक्षक के नाम पर चल रही योगी सरकार इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाती है और गौशालाओं की वास्तविक स्थिति व खर्च की गई धनराशि की पारदर्शी जांच कब तक कराई जाती है। फिलहाल किसान नेता सुशील राज का आमरण अनशन जारी है और प्रशासन की ओर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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