स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर। श्रीरामकथा के तीसरे दिन मुमुक्षु आश्रम परिसर भक्ति, संवेदना और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो उठा, जब कथाव्यास संत विजय कौशल जी महाराज ने ‘नरसी का भात’ प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उनके मधुर एवं मार्मिक प्रस्तुतीकरण ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
कथाव्यास ने बताया कि कृष्णभक्त नरसी मेहता अत्यंत निर्धन थे और अपनी पुत्री नानीबाई के भात की व्यवस्था करने में असमर्थ थे। नानीबाई के ससुराल पक्ष द्वारा व्यंग्य में लंबी मायरा सूची भेजे जाने पर समाज में उनकी स्थिति उपहास का कारण बन गई। ऐसे समय में नरसी ने पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण धनी सेठ के रूप में प्रकट हुए और अद्भुत मायरा भरकर भक्त की लाज रखी। इस प्रसंग का जीवंत वर्णन सुनकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा।
इसके उपरांत कथाव्यास ने देवर्षि नारद एवं भगवान विष्णु से जुड़ा प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि नारद की तपस्या से विचलित होकर इंद्रदेव ने कामदेव को भेजा, किन्तु वे सफल नहीं हो सके। इससे उत्पन्न अहंकार को समाप्त करने हेतु भगवान विष्णु ने एक लीला रची, जिसमें नारद को मोह और फिर वियोग का अनुभव हुआ। इसी श्राप के परिणामस्वरूप भगवान विष्णु को श्रीराम अवतार में माता सीता के वियोग का कष्ट सहना पड़ा।
कथा के अंत में “बाबा भोलेनाथ मेरी नैया तो उबारो...” भजन पर श्रद्धालु झूम उठे और भक्ति भाव में नृत्य करने लगे।
कार्यक्रम के दौरान पूजन एवं आरती सम्पन्न हुई। तीसरे दिन के मुख्य यजमान डॉ के.के. शुक्ला एवं श्रीमती मधुरानी शुक्ला रहे। प्रसाद वितरण श्री कमलेश त्रिवेदी एवं श्रीमती मधुलिका त्रिवेदी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद, स्वामी सर्वेश्वरानंद, स्वामी अभेदानंद, स्वामी गंगेश्वरानंद सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
लखनऊ
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