शाहजहाँपुर, 10 फरवरी 2026।
नदियाँ धरती पर जीव-जन्तुओं, पौधों, मानव जीवन, जंगलों तथा समस्त प्राकृतिक संपदा की जीवनरेखा मानी जाती हैं। मानव सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत का विकास भी नदियों के किनारे ही हुआ है। कृषि, आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन—सभी क्षेत्रों में नदियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उत्तर प्रदेश की गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती, सोन, केन, बेतवा, रामगंगा, गंडक, राप्ती आदि नदियाँ प्रदेश की भौगोलिक संरचना, अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध करती रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सूखती एवं सिल्ट से भर चुकी नदियों के पुनर्जीवन अभियान के अंतर्गत सवा सौ से अधिक नदियों का जीर्णोद्धार कराया है। इनमें जालौन की नून, बाराबंकी की कल्याणी, चित्रकूट की मंदाकिनी, अलीगढ़ की सेंगर, ललितपुर की ओड़ी, जौनपुर की कुँवर, कानपुर देहात की पांडु, गोंडा की मनवर, वाराणसी की नाद व वरूणा, फिरोजाबाद की सिरसा, इटावा की पुरहा, हरदोई की सई तथा अयोध्या की तमसा नदी प्रमुख हैं। इन नदियों की सिल्ट सफाई और प्राकृतिक स्वरूप बहाली से लाखों किसानों एवं आमजन को लाभ मिला है, साथ ही पशु-पक्षियों और वनस्पतियों के संरक्षण में भी सहायता मिली है।
राप्ती नदी गोरखपुर जनपद के रूदाइन-मझगांवा और सेमरौना क्षेत्र के पास गुर्रा एवं राप्ती दो धाराओं में विभाजित हो जाती है। यहाँ से सचौली ग्राम तक राप्ती की लंबाई लगभग 69 किमी तथा गुर्रा की 44 किमी है, जो आगे चलकर पुनः मिल जाती हैं।
ग्रीष्म ऋतु में यह नदी लगभग सूख जाती थी, जिससे भू-गर्भ जलस्तर, जलीय जीव-जन्तु, पशु-पक्षियों और नदी किनारे बसे किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। साथ ही बाढ़ के समय जल प्रवाह असमान होने से तटबंधों पर दबाव बढ़ने और जन-धन हानि की आशंका रहती थी।
पुनरुद्धार कार्य के बाद
नेपाल के नवलपरासी से निकलकर महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया से होती हुई बिहार में घाघरा नदी में मिलने वाली छोटी गंडक नदी का प्रारंभिक हिस्सा लगभग समाप्त हो चुका था और नदी क्षेत्र में खेती होने लगी थी।
सिंचाई विभाग ने नदी की सिल्ट, गाद और झाड़ियों की सफाई कर उसके प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्स्थापित किया। परिणामस्वरूप—
प्रदेश सरकार द्वारा नदियों के पुनर्जीवन का यह अभियान केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संतुलन, कृषि समृद्धि और ग्रामीण जीवन की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। सिंचाई विभाग के सतत प्रयासों से आने वाले वर्षों में नदियों का संरक्षण प्रदेश के सतत विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगा।
लखनऊ
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