शाहजहांपुर। जनपद में आम की फसल के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए बौर निकलने से लेकर फल बनने तक की अवस्था को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को समय रहते कीट एवं रोग प्रबंधन करने की सलाह दी है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वर्तमान समय में आम की फसल पर भुनगा, मिज कीट, थ्रिप्स (रूजी कीट), कैटरपिलर (ब्लैक इंच वर्म) तथा खर्रा रोग का प्रकोप होने की आशंका रहती है। भुनगा कीट कोमल पत्तियों और छोटे फलों का रस चूसकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है, जिससे प्रभावित भाग सूखकर गिर जाते हैं। इसके अतिरिक्त यह कीट मधु जैसा पदार्थ छोड़ता है, जिससे पत्तियों पर काली फफूंद जम जाती है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
मिज कीट मंजरियों और नए फलों में अंडे देकर अंदर ही अंदर क्षति पहुंचाता है, जिससे प्रभावित भाग काला पड़कर सूख जाता है। इनके नियंत्रण के लिए किसानों को 20–25 ब्लू एवं येलो स्टिकी ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाने तथा आवश्यकता अनुसार इमिडाक्लोप्रिड 17.1% एसएल (1 मिली/लीटर पानी) या फिप्रोनिल 5% एससी (1 मिली/लीटर पानी) के छिड़काव की सलाह दी गई है।
खर्रा रोग के प्रकोप में फलों और डंठलों पर सफेद चूर्ण जैसी फफूंद दिखाई देती है, जिससे मंजरियां सूखने लगती हैं। इसके नियंत्रण हेतु घुलनशील गंधक (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव तथा आवश्यकता पड़ने पर हेक्साकोनाजोल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) के प्रयोग की सलाह दी गई है।
इसके अलावा गुजिया कीट के नियंत्रण के लिए पॉलीथीन पट्टी को समय-समय पर साफ रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल का घोल बनाकर शैम्पू या डिटर्जेंट के साथ छिड़काव करने की बात कही गई है।
उद्यान विभाग ने किसानों को विशेष रूप से सलाह दी है कि जब आम के बौर पूरी तरह खिले हों, उस समय रासायनिक दवाओं का छिड़काव न करें, जिससे परागण प्रक्रिया प्रभावित न हो।
यह जानकारी जनहित में प्रसारित की गई है, ताकि किसान समय रहते अपनी फसल को सुरक्षित रख सकें और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
लखनऊ
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